Chronicle – 10 Narmada Parikrma

account – day 8 , 24.2.18 शनिवार

पानेथा आश्रम से हंसोट , विमलेश्वर

पानेथा में प्रातः माँ नर्मदाजी का दर्शन, फिर आश्रम में ही पूजन किया |

नर्मदाजी का इस दक्षिण तट यात्रा का अंतिम गाँव विमलेश्वर है, दक्षिण तट की परिक्रमा  वहां पूर्ण हो जाती है | विमलेश्वर के आगे यदि वाहन से यात्रा की जाये तो नर्मदाजी को लांघना  पड़ता है, इसलिए वहां वाहन से यात्रा नहीं की जाती | वाहनों को विमलेश्वर में छोड़ना पडता है | वाहनों को मीठी तलाई भेजने की व्यवस्था हो जाती है | पदयात्री और वाहन वाले सभी परिक्रमावासी ,विमलेश्वर से मीठी तलाइ  (नर्मदा जी का सागर में संगम- रेवा सागर ) तक बोट से ही  सागर की यात्रा करते हैं | अरब सागर (रेवा सागर) में संगम का दर्शन होता है, बोट रोकी जाती है ,पूजा की जाती है |

अभी तक यात्रियों से व अन्य जानकारियों के अनुसार “ विमलेश्वर में रात्रि विश्राम के बाद , सुबह बोट की यात्रा शुरू होती है , विमलेश्वर में एक मन्दिर है, उसी परिसर में सभी यात्री रात्रि विश्राम करते हैं, कामन लेट्रिन बाथरूम है, पानी और सफाई की व्यवस्था तो है , किन्तु कभी भीड़ अधिक होने से गन्दगी और असुविधा की समस्या आ जाती है “ | इस असुविधा के कारण हमने विचार किया था की विमलेश्वर से अंकलेश्वर लगभग 40 किमी है , रात्रि अंकलेश्वर रुक कर सुबह जल्दी विमलेश्वर चले जायेंगे |

विमलेश्वर मंदिर परिसर व यात्रियों की विश्राम व्यवस्था

पनेथा आश्रम में  जलपान के बाद ,प्रस्थान करने के पूर्व  सरपंच सतीश भाई  (लाला भाई , जबलपुर वाले ) आ गए थे |  न तो उनसे हमारा कोई विशेष परिचय था , ना ही हमारे वहां आने की कोई सुचना उन्हें दी गई थी  | उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था किन्तु उनकी इच्छा हुई थी की आश्रम जाना है और वे आ गए | सतीश भाई ने हमें बताया कि रात्रि विश्राम के लिए अंकलेश्वर जाने की आवश्यकता नहीं है | विमलेश्वर के 15 किमी पहले हंसोट में , पूज्य बाबाजी के शिष्य जबलपुर निवासी गुरु भाई श्री शंकरलाल जी खत्री के पुत्र चेतन भाई की फेक्ट्री  है, और वहां गेस्ट हॉउस में पूरी व्यवस्था हो जाएगी |

पानेथा आश्रम

अमरकंटक  आश्रम से चेतन भाई को सुचना भी दे दी गई थी  | विमलेश्वर पहुँचने के पूर्व ही , चेतन भाई का फोन आ गया कि गेस्ट हॉउस में सब व्यवस्था हो गई है, हमें कहीं अन्यत्र नहीं जाना है | बिना किसी पूर्व तैयारी  के बावजूद व्यवस्था के किस प्रकार संयोग बनते हैं , माँ और बाबाजी की कृपा का हमें अनुभव हुवा |

गुमान देव – हनुमान जी

पानेथा से 10.30 बजे रवाना होकर उमल्ला होते हुवे अंकलेश्वर और वहां से  गुमान देव पहुँचे | यहाँ हनुमानजी का बहुत प्रसिध्ह और बहुत बड़ा मंदिर है | बहुत दर्शनार्थी थे | सिन्दूर की जगह यहाँ हनुमान जी के मुख पर चांदी थी | दर्शन के बाद , बलबला कुंड भी गए | जल का बहुत बड़ा कुंड है जिसमे बुलबुले निकते रहते हैं | जल गर्म नहीं है, सल्फर के कारण बुलबुले निकलते हैं |

उमल्ला से हंसोट लगभग 55 किमी है | फेक्टरी के गेस्ट हॉउस में भोजन कर बोट की व्यवस्था समझने  के लिए विमलेश्वर रवाना हुवे | हंसोट से कतपोर और वहां से 6 किमी विमलेश्वर है | कतपोर में कोटेश्वर महादेव का मंदिर है |

कोटेश्वर mahadev

विमलेश्वर में मंदिर है | साथ ही  बड़े परिसर में  टिन शेड बना हुवा है | यात्रियों के विश्राम करने की सुविधा हेतु दरी , चटाई है | पास ही कामन लेट्रिन बाथरूम है | अधिकतर यात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं | कतपोर ग्राम में वहां के निवासी  ईश्वर भाई पटेल (9723752855) ने पेमेंट बेसिस पर अपने निवास में भी यात्रियों की कुछ बेहतर व्यवस्था कर रखी है |

विमलेश्वर मंदिर परिसर के बाहर ही एक छोटी से दुकान है | वहां रामजी  भाई (9662601816), प्रति यात्री 150 रुपये के हिसाब से बोट की बुकिंग करते हैं |  हमारी  बुकिंग के बाद , हमसे सुबह 6 बजे आने के लिए कहा |

 बुकिंग के बाद  हम हंसोट लौट गए और स्थानीय मंदिर,बिल्वेश्वर महादेव, सूर्य कुंड, और तिलेश्वर महादेव  के  दर्शन किये | कहते हैं यहाँ महर्षि जाबाली ने तप किया था |

सूर्य कुंड

चेतन भाई की फैक्ट्री बहुत बड़ी है,प्लाईवुड बनता है , आटोमेटिक मशीने हैं, विदेशों तक माल भेजा जाता है | पूज्य बाबाजी ने ही फैक्ट्री का उद्घाटन किया था |  परिसर बहुत बड़ा है,गौशाला भी है , सेंकडों कर्मचारियों की भोजन व्यवस्था भी परिसर में ही है | चेतन भाई की अनुपस्थिति में भी वहां के स्टाफ ने हमारी पूरी व्यवस्था कर दी थी | चेतन भाई और उनके स्टाफ को धन्यवाद |फेक्टरी परिसर में आज संध्या सुंदर कांड का पाठ भी आयोजित था | हम भी कुछ समय के लिए पाठ में रहे | रात्रि विश्राम किया |

आज पानेथा (10.30 ) हंसोट (6.30 संध्या) – लगभग 150  किमी, वाया  उमल्ला, गुमानदेव ,बलबला कुंड, हंसोट , कतपोर, विमलेश्वर,       रास्ता: अच्छा है दोपहर , रात्रि भोजन व् विश्राम : गेस्ट हॉउस हंसोट डीज़ल : हंसोट  

विशेष : नवमे दिन का विवरण 3.8.19 को देखिये