ACCOUNT – DAY 19 , 10. 3. 2018
ओम्कारेश्वर –पञ्च कोषीय यात्रा –
रेवा सागरसंगम जल अर्पण अभिषेक –नर्मदा परिक्रमा परिपूर्ण
10 मार्च को प्रातः 6 बजे मंदिर में दर्शन कर पुष्प , बेल पत्र , जल अर्पण किया |
नियम के अनुसार ओम्कारेश्वर की परिक्रमा भी करनी चाहिए | पुष्पा ने पहले तो यह कह दिया कि 7- 8 किमी वह नहीं चल पायेगी , किन्तु मंदिर से बाहर आ कर परिक्रमा मार्ग पर आते ही स्वेच्छा से साथ चलने लगी और ओम्कारेश्वर की परिक्रमा भी पूर्ण की |
ओम्कारेश्वर की परिक्रमा ,राजेंद्र , पुष्पा और मैंने प्रारम्भ की |चढ़ाई उतराइ के साथ पूरी परिक्रमा में मार्ग के किनारे पर लगे गुलाबी रंग के शिलालेखों पर श्रीमत्भागवत गीता के 18 अध्यायों के पूरे 700 संस्कृत के श्लोक हिंदी अनुवाद के साथ लिखे हुवे हैं |

इस पञ्च कोशीय परिक्रमा में अनेकों मंदिर, तीर्थ हैं | कावेरी और नर्मदा जी का संगम है |
संगम में जल स्तर बहुत ही कम था | पथरीला मार्ग और अंदर भी पत्थर | सावधानीपूर्वक संगम में स्नान किया |
कावेरी और नर्मदा जी का संगम

ऋण मुक्तेश्वर, गौरी सोमनाथ तीन मंजिल मंदिर ,
पाताली हनुमानजी, लेटे हुवे हनुमानजी, ग्यारह्मुखी हनुमानजी,
राज राजेश्वरी सेवा संस्थान ,


श्री यन्त्र

सिद्धनाथ बारह द्वारी

बारह द्वारी के पूर्व 

अनेकों दर्शन कर , रुद्राभिषेक के लिए तैयार होकर लगभग 10 बजे ओम्कारेश्वर मंदिर पहुँचे |

परिक्रमा मार्ग से ममलेश्वर 
परिक्रमा पूर्ण कर मंदिर में प्रवेश मार्ग
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंडित श्री अनिल दुबे महाराज जी से भेंट हुई | पंडितजी ने मंदिर में ही रेवा सागर संगम से लाये हुवे जल से ओम्कारेश्वर लिंग की अभिषेक पूजा करवाई |

ओम्कारेश्वर लिंग अनगढ़ है, मंदिर के शिखर के ठीक नीचे न होकर थोडा हटकर है | मंदिर में सीढ़ियां चढ़कर जाने से दूसरी मंजिल में महाकालेश्वर लिंग मूर्ति है और तीसरी मंजिल पर बैद्यनाथेश्वर है , ये दोनो शिखर के नीचे है |
पंडितजी ने वहां भी अभिषेक पूजा करवाई | इसके बाद 9 कन्याओं का पूजन , कढाई प्रसाद से (हलुवा पूड़ी ) सबको भोजन और दक्षिणा दे कर आशीर्वाद प्राप्त किया |

कन्या भोजन 
अब नर्मदा परिक्रमा का क्रम पूर्ण हुवा |
माँ के पास इतने दिन रहे , एकदम छोड़ने का मन नहीं हो रहा था | इसलिए संध्या फिर ब्रम्हांड घाट पर दर्शन स्नान और नमन किया | क्षमा प्रार्थना की – जाने अनजाने कोई भूल हो गई हो , जो कर्म कर सकते थे नहीं किया और किसी मर्यादा का उल्लंघन हो गया हो तो माँ क्षमा कर देना |
11 मार्च 2018 रविवार : उज्जैन – महाकाल
पुज्य बाबाजी की सलाह थी कि परिक्रमा के बाद उज्जैन महाकाल के दर्शन अवश्य कर लेना |
दोपहर तक उज्जैन पहुँच गए | पूज्य राजा बाबा ने बाबाजी के शिष्य श्री शर्माजी को महाकाल की अभिषेक व्यवस्था के लिए पहले ही सूचित कर दिया था | शर्माजी ने पूरी तैयारी कर रखी थी | महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में आनंद के साथ अभिषेक किया | उज्जैन के अन्य मंदिरों के भी दर्शन कर कृतार्थ हुए |
यात्रा के अविस्मरणीय अनुभव और स्मृतियों के साथ 12 मार्च 2018 को राजनांदगांव लौट गए |
दो दिन बाद ही दुर्ग से श्री अनिल जी कश्यप और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुपमा जी आये | अमरकंटक आश्रम से जुड़ने की एक उपलब्धि यह भी है कि अपने परिवार के अतिरिक्त गुरु भाइयों के बहुत बड़े परिवार से बिना स्वार्थ का सम्बन्ध बन जाता है | अनिल जी और उनका पूरा परिवार हमें बहुत स्नेह और सम्मान देता है | वे प्रतिवर्ष दुर्ग में पूज्य बाबाजी का तीन दिन का कार्यक्रम भी करवाते हैं | उन्होंने आदर और स्नेह के साथ मुझे शगुन के रूप में श्रीफल, रेशम की धोती और पुष्पा को साड़ी भेंट की | यात्रा का संक्षिप्त विवरण सुनकर , उन्होंने भी मानस बनाया कि जब भी संभव होगा वे भी परिक्रमा करेंगे |
एक और सुखद संयोग – परिक्रमा का पूरा विवरण लिखने के बाद , कश्यप जी के सुपुत्र आदित्य बाबू को जैसे ही जानकारी मिली तो उन्होंने इसके लिए इतना सुंदर ब्लॉग तैयार कर दिया | दुर्ग से आकर सब कुछ मुझे समझाया | उनके प्रयास के बिना शायद यह वृतांत फाइलों में ही पड़ा रहता , आप सब तक पहुँचाना संभव नहीं हो पाता | उन्हें धन्यवाद | माँ नर्मदा आदित्य बाबू पर भी कृपा करे |

आपकी रूचि के लिए धन्यवाद | माँ नर्मदा की कृपा सब पर सदैव बनी रहे |
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामय ,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चित् दुखभाग्भवेत |
शान्तिः शान्तिः शान्तिः
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पुनश्च :
परिक्रमा प्रारंभ की गई थी मात्र उत्सुकता, उत्साह , किंचित साहस की मानसिकता के साथ | अब तक जीवन में जो सुना था , पढ़ा था , कुछ देखा था , किन्तु वह पढने सुनने और देखने के धरातल तक ही रहा | इन अठारह बीस दिनों में वे सब वैचारिक मथनी से अनुभव में आत्मसात हुए |
अपना बहुत कुछ छोड़ कर चलने वाले पदयात्रियों का न्यूनतम आवश्यकताओं में भी जीवन निर्वाह और प्रवाह रुकता नहीं – अधिक निर्मलता और स्वच्छता के साथ , गतिमान रहता है – जैसे नर्मदाजी का प्रवाह |
बच्चों के समूह में जिसको कुछ भी नहीं मिला , उसके चेहरे पर भी उतनी ही प्रसन्नता जितनी प्रसन्नता उस बच्चे के चेहरे पर है जिसको कुछ मिला है | कोई ईर्ष्या , द्वेष लड़ाई नहीं |
जिन्हें साधारण श्रेणी का समझा जाता है,उनके द्वारा यात्रा के दौरान जलपान , भोजन करने का आग्रह |
समर्पण संगम – आनंद की थोड़ी सी झलक !
ये सब अप्रत्याशित अनुभव हैं ,जिन्हें शब्दों में अभिव्यक्त करने की योग्यता मुझ में नहीं है | ऐसा लगने लगा है कि बहुत देर कर दी , बहुत कुछ छूटने की कसक है | कुछ बदलाव भी हो रहा है |
इसमें ज़रा भी संदेह नहीं है कि सद्गुरु पूज्य बाबाजी और माँ नर्मदा की कृपा और आशीर्वाद से ही यह परिक्रमा संभव हुई और उसका सकारात्मक लाभ प्राप्त हुवा |
पूज्य बाबाजी .नर्मदा माई, माता पिता को हमारा बार बार प्रणाम |
नर्मदे हर | पूज्य सदगुरुदेव बाबाजी की जय |



























































































