Chronicle 22 Narmada Parikrama

ACCOUNT – DAY 19 , 10. 3. 2018

ओम्कारेश्वर –पञ्च कोषीय यात्रा –

रेवा  सागरसंगम  जल अर्पण अभिषेक –नर्मदा परिक्रमा परिपूर्ण

10 मार्च को प्रातः 6 बजे  मंदिर में दर्शन कर पुष्प , बेल पत्र , जल अर्पण किया |

नियम के अनुसार ओम्कारेश्वर की परिक्रमा भी करनी चाहिए | पुष्पा  ने पहले तो यह कह दिया कि 7- 8 किमी वह नहीं चल पायेगी , किन्तु मंदिर से बाहर आ कर परिक्रमा मार्ग पर आते ही स्वेच्छा से साथ चलने लगी और ओम्कारेश्वर की परिक्रमा भी पूर्ण की |

ओम्कारेश्वर की परिक्रमा ,राजेंद्र , पुष्पा और मैंने प्रारम्भ की |चढ़ाई उतराइ के साथ पूरी परिक्रमा में मार्ग के किनारे पर लगे गुलाबी रंग के शिलालेखों पर श्रीमत्भागवत गीता के 18 अध्यायों के पूरे 700 संस्कृत के श्लोक हिंदी अनुवाद के साथ लिखे हुवे हैं |

श्रीमत्भागवत गीता का श्लोक

इस पञ्च कोशीय परिक्रमा में अनेकों मंदिर, तीर्थ हैं | कावेरी और नर्मदा जी का संगम है |

संगम में जल स्तर बहुत ही कम था | पथरीला मार्ग और अंदर भी पत्थर | सावधानीपूर्वक संगम में स्नान किया |

कावेरी और नर्मदा जी का संगम

ऋण मुक्तेश्वर, गौरी सोमनाथ तीन मंजिल मंदिर ,

पाताली  हनुमानजी, लेटे हुवे हनुमानजी, ग्यारह्मुखी हनुमानजी,

राज राजेश्वरी सेवा संस्थान ,

सिद्धनाथ बारह द्वारी

अनेकों दर्शन कर , रुद्राभिषेक के लिए तैयार होकर लगभग 10 बजे  ओम्कारेश्वर मंदिर पहुँचे |

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंडित श्री अनिल दुबे महाराज जी से भेंट हुई | पंडितजी ने मंदिर में ही रेवा सागर संगम से लाये हुवे जल से ओम्कारेश्वर लिंग की अभिषेक पूजा करवाई |

ओम्कारेश्वर में रेवा सागर संगम जल अर्पण , अभिषेक , पूजा

ओम्कारेश्वर लिंग अनगढ़ है, मंदिर के शिखर के ठीक नीचे न होकर थोडा हटकर है | मंदिर में सीढ़ियां चढ़कर जाने से दूसरी  मंजिल में महाकालेश्वर लिंग मूर्ति  है और तीसरी मंजिल पर बैद्यनाथेश्वर है , ये दोनो शिखर के नीचे है |

पंडितजी ने वहां भी अभिषेक पूजा करवाई | इसके बाद 9 कन्याओं का पूजन , कढाई प्रसाद से  (हलुवा पूड़ी ) सबको भोजन और दक्षिणा दे कर आशीर्वाद प्राप्त किया |

अब नर्मदा परिक्रमा का क्रम पूर्ण हुवा |

माँ के पास इतने दिन रहे , एकदम छोड़ने का मन नहीं हो रहा था | इसलिए संध्या फिर ब्रम्हांड घाट पर दर्शन स्नान और नमन किया | क्षमा प्रार्थना की  – जाने अनजाने कोई भूल हो गई हो , जो कर्म कर सकते थे नहीं किया और किसी मर्यादा का उल्लंघन हो गया हो तो माँ क्षमा कर देना |

11 मार्च 2018 रविवार : उज्जैन – महाकाल

पुज्य बाबाजी की सलाह थी कि परिक्रमा के बाद उज्जैन महाकाल के दर्शन अवश्य कर लेना |

दोपहर तक उज्जैन पहुँच गए | पूज्य राजा बाबा ने बाबाजी के  शिष्य श्री शर्माजी को महाकाल की  अभिषेक व्यवस्था के लिए पहले ही सूचित कर दिया था | शर्माजी ने पूरी तैयारी कर रखी थी | महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में आनंद के साथ अभिषेक किया | उज्जैन के अन्य मंदिरों के भी दर्शन कर कृतार्थ हुए |

यात्रा के अविस्मरणीय अनुभव और स्मृतियों के साथ 12 मार्च 2018 को राजनांदगांव लौट गए |

दो दिन बाद ही दुर्ग से श्री अनिल जी कश्यप और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुपमा जी आये | अमरकंटक आश्रम से जुड़ने की एक उपलब्धि यह भी है कि अपने परिवार के अतिरिक्त गुरु भाइयों के बहुत बड़े परिवार से बिना स्वार्थ का सम्बन्ध बन जाता है | अनिल जी और उनका पूरा परिवार हमें बहुत स्नेह और सम्मान देता है | वे प्रतिवर्ष दुर्ग में पूज्य बाबाजी का तीन दिन का कार्यक्रम भी करवाते हैं | उन्होंने आदर और स्नेह के साथ मुझे शगुन के रूप में श्रीफल, रेशम की धोती और पुष्पा को साड़ी भेंट की | यात्रा का संक्षिप्त विवरण सुनकर , उन्होंने भी मानस बनाया कि जब भी संभव होगा वे भी परिक्रमा करेंगे |

एक और सुखद संयोग – परिक्रमा का पूरा विवरण लिखने के बाद , कश्यप जी के सुपुत्र आदित्य बाबू को जैसे ही जानकारी मिली तो उन्होंने इसके लिए इतना सुंदर ब्लॉग तैयार कर दिया | दुर्ग से आकर सब कुछ मुझे समझाया | उनके प्रयास के बिना शायद यह वृतांत फाइलों में ही पड़ा रहता , आप सब तक पहुँचाना संभव नहीं हो पाता | उन्हें धन्यवाद | माँ नर्मदा आदित्य बाबू पर भी कृपा करे |

आपकी रूचि के लिए धन्यवाद | माँ नर्मदा की कृपा सब पर सदैव बनी रहे |

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामय ,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चित् दुखभाग्भवेत |

शान्तिः शान्तिः शान्तिः

* * * * * * * * *

पुनश्च :

परिक्रमा प्रारंभ की गई थी मात्र उत्सुकता, उत्साह , किंचित साहस की मानसिकता के साथ | अब तक जीवन में जो सुना था , पढ़ा था , कुछ  देखा था , किन्तु वह पढने सुनने और देखने के धरातल तक ही रहा | इन अठारह बीस दिनों में वे सब वैचारिक मथनी से अनुभव में आत्मसात हुए |

अपना बहुत कुछ छोड़ कर चलने वाले पदयात्रियों का न्यूनतम आवश्यकताओं  में भी जीवन निर्वाह और प्रवाह रुकता नहीं – अधिक निर्मलता  और स्वच्छता के साथ , गतिमान रहता है – जैसे नर्मदाजी का प्रवाह |

बच्चों के समूह में जिसको कुछ भी नहीं मिला , उसके चेहरे पर भी उतनी ही प्रसन्नता जितनी प्रसन्नता उस बच्चे के चेहरे पर है जिसको कुछ मिला है | कोई ईर्ष्या , द्वेष लड़ाई नहीं |

जिन्हें साधारण श्रेणी का समझा जाता है,उनके द्वारा यात्रा के दौरान जलपान , भोजन करने का आग्रह  |

समर्पण संगम – आनंद की थोड़ी सी झलक !

ये सब अप्रत्याशित अनुभव हैं ,जिन्हें शब्दों में अभिव्यक्त करने की योग्यता मुझ में नहीं है | ऐसा लगने लगा है कि बहुत देर कर दी , बहुत कुछ छूटने की कसक है | कुछ बदलाव भी हो रहा है | 

इसमें ज़रा भी संदेह नहीं है कि सद्गुरु पूज्य बाबाजी और  माँ  नर्मदा की कृपा और आशीर्वाद से ही यह परिक्रमा संभव हुई और उसका सकारात्मक लाभ प्राप्त हुवा |

पूज्य बाबाजी .नर्मदा माई, माता पिता को हमारा बार बार प्रणाम |

नर्मदे हर | पूज्य सदगुरुदेव बाबाजी की जय |

पूज्य बाबाजी का आशीर्वाद ,स्नेह, कृपा अक्षुण्ण रहे |

Chronicle -21 Narmada Parikrama

ACCOUNT – DAY 18, 9.3.18 शुक्रवार

ओम्कारेश्वर –

 9 मार्च को इंदौर पहुँचे | इंदौर से 80 किलोमीटर की दुरी पर तीर्थ नगरी ओम्कारेश्वर संध्या 5 बजे  पहुँच गए | मेरे ससुराल पक्ष से पुष्पा के भाई राजेंद्र और मामा मामी भी इंदौर से साथ में थे | श्री गजानन महाराज ट्रस्ट शेगांव संचालित  भक्त निवास में विश्राम हेतु कमरे बुक किये |

संध्या में ब्रम्हांड घाट पर बहुत समय तक शांत वातावरण का आनंद लेते रहे  | स्थानीय लोगों ने वहां स्पीकर माइक लगा कर नित्य की भांति नर्मदा अष्टकं का पाठ संध्या कालीन पूजा आरती की |

ब्रम्हांड घाट
शयन आरती के समय -मंदिर
शयन कक्ष में चौपड़ पासा ,झूला

मंदिर में ही महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंदपूरी महाराजजी  भी थे | विवेकानंदपूरी महाराज जी , पूज्य बाबाजी का बहुत सन्मान करते हैं , डोल आश्रम के वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में भी आप थे | ओम्कारेश्वर रोड खंडवा में आपका बड़ा आश्रम भी है | हमने नर्मदा परिक्रमा पूरी की , जानकर उन्हें प्रसन्नता हुई, आशीर्वाद दिया | मंदिर के प्रमुख पंडित अनिल महाराज जी को कहा कि  कल ओम्कारेश्वर में विधि पूर्वक रुद्राभिषेक करवा देवें | बाबाजी की कृपा से सब कार्य उतरोत्तर व्यवस्थित ढंग से होते गए |

मंदिर प्रांगण में स्वामी विवेकानंद पुरी जी के साथ

रात्रि विश्राम भक्त निवास में किया |  

विशेष : समापन के लिए भी देखिये | आपकी रूचि के लिये धन्यवाद |    

Chronicle – 20NarmadaParikrama

account – day 17 , 5.3.2018 सोमवार

अमरकंटक – माई की बगिया , परिक्रमा पूर्ण

पूर्व में सुचना दे दी गई थी, उसके  अनुसार आज माई की बगिया में कढाई प्रसाद तैयार हुवा |  पंडितों ने नर्मदा माई ,कन्याओं का पूजन करवाया | कन्याओं ने  आशीर्वाद दिया |  मंदिर में  हम सब ने दर्शन किया | आज  उत्तर तट की परिक्रमा भी पूर्ण हुई |

माई की बगिया
कन्या भोजन ,पूजन

वैसे तो यात्रा की दृष्टि से परिक्रमा पूर्ण हो गई | नियम  के अनुसार यात्रा के प्रारंभ में नर्मदा जी का जो जल यहाँ से लिया था और उस जल में से कुछ गोमुख ममलेश्वर (ओम्कारेश्वर ) में अर्पण किया था, फिर गोमुख का जल रेवा सागर संगम में अर्पण किया और रेवा सागर का कुछ जल  यहाँ और यहाँ से पुनः जल लेकर ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करने से ही परिक्रमा की पूर्णता होती है | ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करने के लिए हमने भी पुनः नर्मदा  जल ले लिया |

“परिक्रमा यात्रा “ पूर्ण होने पर अब नर्मदाजी के पुल पर से जा सकते हैं , अब  नर्मदाजी को लांघने से कोई नियम भंग नहीं होता – कोई दोष नहीं लगता | सत्रह दिनों की यह परिक्रमा पूज्य बाबाजी की कृपा व आशीर्वाद से  बिना किसी विघ्न असुविधा, परेशानी के पूर्ण हुई |

आज राजनांद्गाँव के लिए प्रस्थान किया | ज्ञात हुवा कि डोल आश्रम में स्थापना  के लिए दक्षिण भारत से विशेष वाहन में श्री यंत्र ले कर पूज्य राजा बाबा आज ही रायपुर पहुँचे हैं  | यह हमारा सौभाग्य ही था कि नर्मदा परिक्रमा के अंतिम चरण में रायपुर में श्री यंत्र के दर्शन भी प्राप्त हुए | राजा बाबा का आशीर्वाद भी मिला |

विशेष ; अठारहवें दिन का विवरण भी को देखिये

Chronicle-19 Narmada Prikrama

account – day 16 रविवार 

जबलपुर से अमरकंटक

नर्मदाजी : जिलहेरी घाट , जोगी टिकरिया (डिंडोरी,)

आज सुबह जलेरी घाट का दर्शन किया , यह ग्वारी घाट की अपेक्षा अधिक बड़ा , साफ सुथरा है | आज फिर  माँ की गोद में स्नान  का आनंद लिया | पूजा की |जिलहरी घाट पर छोटे छोटे बहुत से मंदिर हैं जहाँ शिवलिंग की पूजा होती है |

लगभग 9.30 बजे जबलपुर से प्रस्थान किया | करीब  3 घंटे बाद मार्ग में ही बडखेरा आश्रम शहपुरा में एक मंदिर देख कर रुके | अर्धनारीश्वर शंकरजी, हनुमानजी, दुर्गाजी के  दर्शन के साथ ही , एक शिवलिंग पर अनेको शिवलिंग के दर्शन किये |

  • बडखेरा आश्रम शहपूरा के मंदिर

लगभग 3 बजे जोगी टिकरिया (डिंडोरी के दुसरे किनारे ) में पुनः नर्मदाजी के दर्शन किये | जलराशि तो इतनी कम थी कि लोटा भरकर ही स्नान किया जा सकता था , किन्तु शांत प्रवाह , शीतलता और चट्टानों पर बहता आईने की तरह साफ जल देख स्नान की इच्छा रोक नहीं सका, गोद में बैठकर नहीं लेट कर ही स्नान का आनंद का आनंद लिया |

घाट के पास  ,कुछ कार ,ट्रक बस खड़ीं थीं | बताया गया की नेता जी की पैदल परिक्रमा से संबधित है , अमरकंटक जाने वाली है, समापन की ओर है |

वहां से  प्रस्थान किया | बिना रेलिंग के पुल को परिक्रमावासी लांघें नहीं, इसलिए “ माँ नर्मदा परिक्रमा पथ – उत्तर तट “ का मार्ग संकेतक भी लगा था |

राजेन्द्रग्राम ,पोडकी होते हुवे अपने  श्री कल्याण सेवा आश्रम पहंच गए | आश्रम में पूज्य श्री हिमान्द्री महाराज जी थे उन से आशीर्वाद प्राप्त किया | कल सुबह माई  की बगिया में माँ का व कन्याओं का पूजन , कडाही प्रसाद आदि की व्यवस्था की चर्चा की | पूज्य बाबाजी को तो सब जानकारी रहती ही है , फिर भी उनको भी सुचना दे दी कि आपकी कृपा से हम आश्रम पहुँच गए हैं | परिक्रमा पूर्णता की ओर है |

आज जबलपुर (9.30 बजे) से अमरकंटक (6 बजे) लगभग 300 किमी वाया कुंदम ,शहपुरा , जोगी टिकरिया राजेंद्र ग्राम , पोडकी अमरकंटक रास्ता – अच्छा

विशेष : सत्रहवें दिन का विवरण भी को देखिये

Chronicle -18 Narmada Parikrama

account – day 15, 3.3.2018 शनिवार

जबलपुर

नर्मदाजी दर्शन : ग्वारीघाट

संस्कारधानी जबलपुर के निवासियों पर नर्मदाजी ने असीम कृपा की है | जबलपुर में नर्मदाजी के अनेकों घाट हैं | मुख्य रूप से ग्वारी घाट, तिलवारा घाट, र्त्रिशूल घाट, लम्हेटा घाट , भेड़ाघाट , सरस्वती  घाट , जलेरी घाट हैं |

कल सरस्वती  घाट  के दर्शन किये थे | आज सुबह ग्वारीघाट का दर्शन किया | साफ सुथरा बहुत बड़ा घाट है, जल साफ है | अभी ज्यादा भीड़ नहीं थी | दर्शनार्थियों  को दुसरे किनारे पर ले जाने और नौका विहार के लिए नौकाएं भी उपलब्ध थी स्नान पूजन किया |

ग्वारी घाट

पक्षीयों के झुण्ड भी नर्मदाजी का आनंद ले रहे थे | | दुसरे किनारे पर विशाल गुरुद्वारा है | यहाँ सिद्ध कुंड भी है  |  वातावरण बिलकुल शांत था |

फिर पूज्य स्वामी गिरिशानन्दजी जो पूज्य बाबाजी के अत्यंत स्नेही है, उनके दर्शन हेतु  साकेत धाम पहुँचे | बडा  परिसर , शांत पवित्र  वातावरण  में रामेश्वरम महादेव के दर्शन किये |

साकेत धाम

तत्पश्चात पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्यामदास जी महाराज के आश्रम गीता धाम जा कर उनके दर्शन भी किये  |

डीज़ल – जबलपुर   

विशेष : सोलहवें दिन का विवरण भी को देखिये

Chronicle 17 , Narmada Parikrama

account – Day 14 , 2.3.2018 शुक्रवार

बरेली से जबलपुर

नर्मदा दर्शन : बरमान घाट, सरस्वती घाट

कल होलिका दहन था | आज रंगोत्सव है , सभी संस्थान बंद थे | हमें कल और आज भी कोई परेशानी नहीं हुई | बरेली में ही ठेले पर स्वादिष्ट पोहे ,समोसे का जलपान किया | यहाँ भी बरेली के एक सज्जन श्री राहुल गुप्ता , हमारे  बहुत निवेदन करने  के बाद भी माने नहीं  – कहा कि परिक्रमा तभी सफल होगी जब परिक्रमा वासी किसी से ले कर क्षुधा  शांत करें | उनका आग्रह और स्नेह के आगे हम को चुप ही रहना पड़ा और जलपान का भुगतान उन्होंने ही किया | हमसे  उपहार स्वरुप कुछ लिया भी नहीं | | गुप्ताजी ने कहा की 6 किमी दूर छिंद धाम है जहाँ दर्शन अवश्य करें | 8.30 बजे  बरेली से प्रस्थान किया |

छिंद धाम के  भव्य मंदिर में हनुमानजी का दर्शन कर जबलपुर के लिए प्रस्थान किया  |

बरमान घाट

बरेली से बरमान घाट लगभग 108 किमी की दुरी पर है , 12.30 पर पहुँचे | नर्मदाजी के दर्शन किये | कहते हैं यह  ब्रम्हाजी की तपो भूमि है , और नदी के मध्य में सूर्य कुंड और ब्रम्ह कुंड है | दुसरे किनारे पर विशाल मंदिर है | घाट काफ़ी बड़ा है | जल भी साफ था | नर्मदाजी में स्नान  कर लिया |

नर्मदाजी बरमा’न

यहाँ होली खेलते हुवे बच्चे मिले | उन्हें उपहार मिला तो बहुत खुश हुवे | उन्हें प्रसन्न देख कर हम भी  बहुत  प्रसन्न हुवे |

बरमान से लगभग 1 घंटे बाद मार्ग पर ही एक बोर्ड पर  आदि शंकराचार्य जी के गुरु पूज्य , गोविन्द पादाचार्य जी की गुफा अन्दर 7 किमी दुरी पर है ऐसा अंकित था | रास्ता कच्चा था , विचार बना कि किसी और समय में दर्शन करेंगे | 

जबलपुर

बरमान से जबलपुर पहुँचे | मार्ग में सरस्वती घाट पर भी नर्मदाजी के दर्शन किये |

सरस्वती घाट

यहाँ से भेडाघाट जाने के लिए  नर्मदा जी का एक पुल  लांघना पडेगा | वहां स्थित हरिहर आश्रम के स्वामीजी ने बताया की “यह पुरानी नर्मदा जी का पुल है , कुछ लोग लांघते हैं , कुछ नहीं | यदि  आपने अभी तक नियम से यात्रा की है तो अब क्यों नियम तोड़ते है “ | हमें उचित लगा , हम भेडाघाट  नहीं गए |

बेटी रानी के यहाँ 4 बजे  जबलपुर पहुँच गए | जबलपुर में पूज्य बाबाजी के कई सेवक शिष्य हैं |  प्रति वर्ष बाबाजी के अनेक कार्यक्रम जबलपुर में सामाजिक व धर्मिक संस्थाओं द्वारा आयोजित किये जाते हैं | बाबाजी के सेवक गुरुभाई श्री शंकरलाल जी खत्री और उनके अभिन्न मित्र  गुरुभाई श्री वासुदेवजी खत्री   (सांवला जी)  जिन्होंने  लम्हेटा घाट पर  विशाल कल्याणीका तपोवन का निर्माण किया है |

कल्याणिका तपोवन लम्हेटाघाट

वासुदेवजी और शंकरलाल जी संध्या को रानी के यहाँ आये | नर्मदाजी की परिक्रमा की बधाइयाँ दीं |  स्नेहसिक्त  होकर मुझे और पुष्पा को  शाल तथा श्री फल भेंट किये |  गुरुभाई डाक्टर गुप्ता जी व उनकी धर्मपत्नी गायत्रीजी भी आये | उन्होंने भी बहुत बधाइयाँ दी | इस स्नेह , भेंट , मिलन के लिए सभी को धन्यवाद|

आज – बरेली (8.30 बजे) से जबलपुर (4 बजे) कुल 230किमी – रास्ता अच्छा वाया छिंद धाम, बरमान घाट, सरस्वती घाट – जलपान : बरेली, रात्रि – जबलपुर

विशेष : शेष यात्रा का विवरण 5.8.19 को देखिये

Chronicle 16 , Narmada Parikrama

account – day 13 1.3.2018 गुरुवार

बडवाहा से बरेली

नर्मदा जी : बडवाहा , नेमावर, बुधनी ,बांदरा भान

हरिओम आश्रम,  जहाँ कल विश्राम किया था , वहां  से ममलेश्वर जाने के लिए नर्मदा जी के पुल पर से जाना पड़ता ,नियम का उल्लंघन न हो , इसलिए आश्रम के निकट बने हुवे खेड़ीघाट पर ही प्रातः नर्मदा में स्नान किया , पूजन किया |

खेड़ीघाट पर स्नान

आश्रम में जलपान के पश्चात बरेली के लिए प्रस्थान किया | बडवाहा से खातेगांव 140 किमी का रास्ता बहुत ख़राब था |

नेमावर

लगभग 2.30 बजे नेमावर पहुँचे | नर्मदा जी के एक किनारे हांडिया (हरदा , परिक्रमा का तीसरा दिन)  और दुसरे किनारे नेमावर – नर्मदा जी का नाभि स्थान है  | जल बिलकुल साफ | नेमावर किनारे से  नाभि  , हंडिया की अपेक्षा नजदीक है, दूर से ही दर्शन किये |

ज संन्ध्या होली दहन व कल रंग उत्सव है | नेमावर में स्थानीय लोगों ने नर्मदा जी के किनारे होली का रंग जमाना शुरू कर दिया था , किन्तु हमें कोई भी परेशानी नहीं हुई |  

नेमावर
बताते हैं यहाँ पर सिद्धनाथ मंदिर है जिसकी स्थापना सनकादि ऋषियों ने की थी | इसे  जमदग्नि ऋषि की तपो भूमि  भी मानते हैं | मंदिर की नक्काशी कारीगिरी देखने लायक है ,जिसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया है |

रेहती रामगढ़ा

नेमावर से लगभग 55 किमी बरेली मार्ग पर  रेहती रामगढ़ा में भव्य सुंदर  मंदिर दिखाई दिया | विशाल परिसर में स्व्च्छता थी |विभिन्न मंदिरों के  दर्शन किये |

बिजासन माता मंदिर  

फिर नेमावर से सलकनपुर , वहां से बरेली मार्ग पर पर्वत पर बिजासन माता मंदिर है | कार से भी मार्ग  है और रोप वे भी है | बहुत ही विशाल सुंदर परिसर, फेंसिंग से घिरा हुवा ,अच्छा रख रखाव, यात्रियों के लिए बगीचे के साथ बैठने के उचित व्यवस्था, प्राकृतिक सौंदर्य – ये सब आज भी स्मृती पटल पर है | बिजासन माता व् अन्य दर्शन कर 6 बजे वहां से प्रस्थान किया |

बिजासन

बुधनी – बांदरा भान – बरेली 

मार्ग में बुधनी में नर्मदाजी दर्शन किया |  फिर बांदरा भान , जहाँ तवा नदी और नर्मदाजी का संगम , स्पष्ट दिखता है, जल भी स्वच्छ है , दर्शन किये | बान्दराभन तपो भूमि है |

बान्दराभान दर्शन करने के बाद लगभग 7 बजे बरेली पहुँचे | बरेली में गैलेक्सी पैलेस नया होटल बना है जहाँ विश्राम किया |

आज – बडवाहा (10 बजे ) से बरेली ( 8 बजे) लगभग 330 किमी वाया नेमावर ,रुद्रधाम रेहती ,सलकनपुर , बुधनी , बान्दराभान से बरेली, रास्ता – बडवाहा से खातेगांव 140 किमी ठीक नही जलपान –आश्रम,  भोजन – ढाबा , रात्रि विश्राम व भोजन – बरेली डीज़ल – बरेली

विशेष : चौदहवें दिन का विवरण 4.8.19 को देखिये

Chronicle -15 Narmada Parikrama

account – day 12 , 28.2.18 बुधवार

मांडव से बडवाहा

नर्मदाजी  : महेश्वर, मंडलेश्वर, बडवाहा

मांडव मे रेवा कुंड के दर्शन किये | लोगों का विश्वास है कि रेवा कुंड में नर्मदाजी का जल आता है | इसलिए परिक्रमावासी कुंड में स्नान / दर्शन करने अवश्य आते हैं | बताते हैं कि रानी रूपमती नित्य नर्मदाजी के दर्शन करने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करती थी | सुविधा की दृष्टि से रेवा कुंड का निर्माण किया गया | वर्षा ऋतू में रेवा कुंड पूरा भर जाता है | महाराष्ट्र से बस से आये हुवे परिक्रमा वासी कुंड में स्नान पूजा कर रहे थे, और पास ही  जलपान भोजन बन रहा था | रेवा कुंड के बाद नीलकंठ पेलेस के  दर्शन , जलपान कर , हमने महेश्वर के लिए प्रस्थान किया |

रेवा कुंड

दुधी धामनोद

महेश्वर जाने  के मार्ग में दुधी धामनोद ग्राम में थोड़ी ऊंचाई पर एक भव्य मंदिर दिखाई दिया | वहां पहुँचने पर अत्यंत प्रसन्नता हुई | विशाल परिसर में श्री राज राजेश्वरी उपासना केंद्र  है | ललिता महात्रिपुर सुंदरी , गणेशजी, राम दरबार कृष्णजी व अन्य मंदिरों के दर्शन , गौशाला , नवग्रह हवन कुंड, और विद्यार्थियों द्वारा संस्कृत पाठ  पुरे वातावरण में  पवित्रता  और भव्यता  की वृद्धि कर रहे थे | कुछ समय वहां रुके ,  बहुत अच्छा लगा | आज भी स्मृति बनी हुई है | महेश्वर के लिए प्रस्थान किया |

दुधी धामनोद राज राजेश्वरी धाम

महेश्वर

नर्मदाजी महेश्वर

महेश्वर में नर्मदाजी की विशालता , स्वच्छ , विपुल , जल राशी , बड़े बड़े  सुन्दर साफ सुथरे घाट हैं | और गहराई ज्यादा होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से स्नान के लिए चैन लगी है ताकि माँ की गोद में सुरक्षित स्नानकर सकें | , स्नान के बाद पूजन , प्रसाद वितरण | फिर भगवान बांके बिहारी के मंदिर में शुद्ध पवित्र गरमा गरम भोजन – ठाट ही ठाट – क्या कहना |

महेश्वर में ही राज राजेश्वरी मंदिर  , महाप्रभु जी की बैठक , शिव लिंग जिनकी पूजा स्वयं रानी करती थीं  , रानी अहिल्या बाई होल्कर के महल किला , व्यवस्था  सब कुछ  अद्वितीय है | होल्कर घराने का इतिहास – सब के दर्शन किये | महेश्वर का पुराना नाम माहिष्मती पुरी है | इसे गुप्त काशी भी कहा जाता है और काशी के सामान ही इसका महत्व है |

मंडलेश्वर  

महेश्वर से बड़वाहा ,के मार्ग में एक स्थान मंडलेश्वर आता है , यह जिला भी है | यहाँ भी नर्मदा जी के  दर्शन , राम मंदिर ,काल भैरव मंदिर , छप्पन देव मंदिर के दर्शन के बाद गुप्तेश्वर मंदिर के दर्शन भी किये | ऐसा कहा जाता है कि जगत्गुरू श्री शंकराचार्य जी एवं परम  विद्वान मंडन मिश्र जीके बीच यहाँ शास्त्रार्थ हुवा था जिसमे मंडन मिश्र जी की पराजय हुई | तब उनकी विदुषी पत्नी भारती देवी  ने शंकराचार्य जी से शास्त्रार्थ किया | भारती  देवी ने जगतगुरु से काम संबंधित प्रश्न पूछे , तब जगतगुरु ने छह माह का समय माँगा था ,और इस काल के लिए उसी स्थान पर समाधी ली थी | परिक्रमा  के दौरान अति सहजता से ऐसे ऐतिहासिक , पौराणिक स्थानों का दर्शन लाभ भी हुवा |

बडवाहा

संध्या लगभग 5.30 बजे बडवाहा , हरी ॐ आश्रम पहुँचे | पूज्य संत भागवतानन्द जी महाराज , पूज्य बाबाजी के साथ के ही हैं और बाबाजी से बहुत स्नेह रखते हैं| खूब भजन करते हैं | दर्शन कर प्रणाम किया | पूज्य बाबाजी की कृपा से स्वामी जी ने आश्रम में ही हमारी व्यवस्था कर दी | विशाल आश्रम में मंदिर  , संतों व परिक्रमा वासियों के  आवास भोजन की पूर्ण व्यवस्था है | संध्या में खेडीघाट पर नर्मदा जी के दर्शन किये | रात्रि में आश्रम  में संतों ने भजन किया हमें भी उपस्थित रहने का सौभाग्य प्राप्त हुवा |

आज मांडव (10 बजे ) बडवाहा ( 5.30 बजे ) लगभग 120 किमी वाया  दुधी धामनोद. महेश्वर. मंडलेश्वर , रास्ता अच्छा जलपान – मांडव ,  दोपहर भोजन : बांके बिहारी मंदिर , महेश्वर , रात्रि भोजन विश्राम –हरिओम आश्रम बडवाहा डीज़ल – मांडव

विशेष: अगला विवरण 4.8.19 को देखिये

Chronicle -14 Narmda Parikrma

account -day 11, 27.2.18 मंगलवार

गरुडेश्वर से मांडव

नर्मदा  : गरुडेश्वर,  कोटेश्वर (निसारपुर) मनावर

आज 27  फरवरी मंगलवार , यात्रा का ग्यारहवाँ दिन | प्रातः दत्त संस्थान  मंदिर परिसर से लगे हुवे घाट पर नर्मदा स्नान ,पूजन किया | दत्त मंदिर, नार्देश्वर मंदिर, श्री  वासुदेवानंद  सरस्वती समाधी का दर्शन  किया  |

जलपान के पश्चात हांपेश्वर (76किमी) के लिए प्रस्थान किया | कवांट और कड़ीपानी  होते हुवे हांपेश्वर पहुँचे | सरदार सरोवर बाँध के कारण पुराना  मंदिर डूब गया है इसलिए पुनर्स्थापित जो बहुत ही सुंदर मंदिर है ,आगे भी  निर्माण होरहा है  , दर्शन किये | कड़ीपानी से हांपेश्वर 6 किमी पहाड़ी रास्ता है |

हान्फेश्वर मंदिर

हांपेश्वर से वापिस कड़ीपानी  और कवांट से  चकताला ,चकताला  से अलीराजपुर मार्ग पर , अलीराजपुर के  5 किमी पहले एक परिसर में बहुत पुराना किन्तु बारीक़ नक्काशी और कारीगिरी का एक मंदिर दिखाई दिया  | कुछ समय वहां  रुके | संभवतः पुरातत्व विभाग के अंतर्गत है ,किन्तु वहां किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं मिली | अलीराजपुर में भोजन किया |

अलीराजपुर से 5 किमी पहले

फिर कुक्षी से आगे  निसरपुर के निकट नर्मदा जी का दर्शन ,नमन किया |  और कोटेश्वर महादेव के दर्शन किये |

निसारपुर से प्रस्थान कर मनावर पहुँचे | मनावर मंदिर में परिक्रमा वासियों के लिए सदाव्रत व्यवस्था है | वहां के व्यवस्थापक ने रात्रि विश्राम के लिए हमें कहा |

मनावर मंदिर

मनावर  में मंदिर के दर्शन कर धरमपुरी होते हुवे माँडव के लिए संध्या लगभग 6 बजे प्रस्थान किया | अँधेरा हो गया था ,रास्ता ठीक है –ऐसा बताया गया किन्तु  रास्ता बहुत ही ख़राब था | धीरे धीरे रात्रि लगभग 9 बजे मांडव पहुँच कर जैन मंदिर में विश्राम किया | यह भी अनुशाषित बहुत बड़ा परिसर , सभी सुविधाओं के साथ उपलब्ध है | मांडव में  शुद्ध शाकाहारी भोजनालय में भोजन किया  |

आज गरुडेश्वर (10 बजे) से मांडव (रात्रि 9 बजे) , कुल 300 किमी वाया नसवाडी, कावंत , कड़ीपानी , हांपेश्वर, अलीराजपुर, कुक्षी, निसारपुर, मनावर, धरमपुरी  मांडव , रास्ता धरमपुरी से मांडव बहुत ख़राब था | भोजन : अलीराजपुर , रात्रि विश्राम – जैन भवन मांडव डीज़ल – गरुडेश्वर

विशेष:बारहवें दिन का विवरण 3.8.19 को देखिये

Chronicle -13 Narmada Parikrama

account- Day 10, 26.2.18 सोमवार

नारेश्वर से गरुडेश्वर

नर्मदाजी : नारेश्वर , मालसर, , बदरिका आश्रम , चाणोद , करनाली , तिलकवाडा   

          नारेश्वर – स्वामी श्री रंग अवधूत सेवा संस्थान

श्री रंग आशीष आवास से 1 किमी पर ही विशाल नर्मदाजी हैं | रास्ते में और नर्मदाजी के किनारे पर बोर्ड  लगे थे कि नदी में मगर मच्छ हैं, सावधान रहें | नर्मदाजी का वाहन मगर ही है | बहुत सी सीढियाँ उतरने के बाद , कीचड़ नहीं था ,घुटने तक जल और वह भी क्रिस्टल क्लियर | लम्बी जीवन यात्रा की सीढ़ियों पर उतरते चढ़ते व्यवहारों और  अनुभवों के बाद व्यक्ति का ह्रदय भी तो शांत और निर्मल हो जाना चाहिये |  

माँ की गोद में बैठकर स्नान करने का बहुत आनंद आया | खुले मैदान में खाने पीने के बहुत से स्टाल लगे थे | इस समय सभी खाली थे , कपड़े बदलने की सुविधा भी थी | देखा कि पास के गाँव से लोग यहाँ लोग फेरी (बोट) से आ रहे हैं | स्नान के बाद पूजा , आरती और प्रसाद वितरण किया |

छोटे से गाँव में जहाँ कोई बड़ा व्यवसाय उद्योग नहीं है,  आश्रम और नर्मदाजी के बीच रास्ते में बहु मंजिली इमारतों में अनेकों खाली फ्लैट दिखे | बताया गया कि सभी फ्लैट गुजरात ,महाराष्ट्र अन्य स्थानों के  लोगों ने खरीद लिए हैं  और जब आश्रम में कोई उत्सव या कार्यक्रम होता है तो हजारों श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था यहाँ की जाती हैं | संतो पर नर्मदा जी की कृपा और जन समुदाय की ऐसी श्रद्धा भारत के अतिरिक्त और कहाँ मिलेगी |

स्नान के बाद श्री रंग अवधूत सेवा संस्थान का दर्शन किया | स्वामी रंग अवधूत जी  का जन्म 21 नवम्बर 1898 बड़ोदा में हुवा | स्वामी वासुदेवानान्दजी सरस्वती उनके आध्यात्मिक गुरु थे | स्वामी रंग अवधूत जी ने नर्मदा परिक्रमा की और नारेश्वर में ही नर्मदाजी के तट पर सेवा प्रकल्प ले कर रम गए | 19 नवम्बर 1968 को हरिद्वार में शरीर छोड़ा | उनके अनुयायी उन्हें भगवान् दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं | 21 नवम्बर 68 को उनके पार्थिव  शरीर को नारेश्वर लाया गया | अंतिम  संस्कार किया गया |

भगवान दत्ता त्रय अवतार श्री रंग अवधूत स्वामी

श्री रंग अवधूत संस्थान  आश्रम बहुत बडे परिसर में फैला हुवा है | स्वच्छ शांत अनुशाषित वातावरण  है – ध्यान मंदिर भी है | वहां के शिलालेखों से ऐसी जानकारी मिलती है कि  रंग अवधूत जी अपनी माता के आदेश को सुप्रीमकोर्ट के आदेश की तरह मानते थे | मंदिर या किसी भी स्थल पर पैसे देने या रखने की स्पष्ट मनाई लिख कर की गई है | जो भी देना है , कार्यालय में दिया जाता है और उसकी रसीद दी जाती है |आश्रम में सभी जगह केवल गुजराती भाषा में ही जानकारियां लिखी गई हैं | मैंने व्यवस्थापक से निवेदन किया कि अन्य भाषा के दर्शनार्थी भी आते हैं , अतः हिंदी में भी लिखा जावे |

सुबह 11.00 बजे और संन्ध्या 7.00 बजे आश्रम में निशुल्क भोजन व्यवस्था है | हमें भी भोजन प्रसाद  हेतु आमंत्रित किया गया | नर्मदा जी को भोग लगा हलुवा ,दाल चावल सब्जी इतना स्वादिष्ट और गरम भोजन आज भी याद है | माँ की कृपा हुई तो दुबारा भी यह प्रसाद प्राप्त करेंगे | उसी दिन किसी स्कूल से सैंकड़ों विकलांग, सूरदास विद्यार्थी आये थे | सभी दर्शनार्थियों को निशुल्क  भोजन दिया जाता है | भोजन प्रसाद प्राप्ति के बाद प्रस्थान किया |

मालसर

बद्रीका आश्रम से गरुडेश्वर के मार्ग पर , नर्मदाजी के उत्तर तट पर  मालसर है वहां  भी कुछ समय के लिए रुके | अंगारेश्वर ,शिव मंदिर, पांडू तीर्थ तथा अयोनिज तीर्थ  है | अयोनिज ऋषि की तपोभूमि है | राजा पांडू और मंगल ग्रह ने तप किया था | यहाँ  डोंगरे महाराज का  बहुत बड़ा  आश्रम है ,जहां , पूर्व सूचना के आधार पर रुकने  भोजन की व्यवस्था हो जाती है | सत्संग , भजन कार्यक्रम चलते रहते हैं |

मालसर नर्मदाजी

अनुसूया माता मंदिर

नारेश्वर से लगभग 57 किमी अनुसूया में अनुसूया माता का मंदिर है , जहाँ अनुसूया माता ने तपस्या की थी | तपस्या के  फलस्वरूप माता अनुसूया को ब्रम्हा के तेज से चन्द्र,  , विष्णु के तेज से दत्तात्रेय  व् महेश के तेज से दुर्वासा पुत्र रूप में प्राप्त हुवे | मंदिर में ही छोटा सा किन्तु बहुत गहरा कुंवा है , कहते है की माता की तपस्या के कारण गंगा जी भी यहाँ आई |

अनुसूया माता मंदिर

बदरिका आश्रम

अनुसुया माता मंदिर से बदरिका आश्रम गए | बहत ही सुंदर मंदिर है, परिसर बहुत बड़ा है, शंकर जी  और हनुमान जी की विशालकाय मूर्तियां  है, सामने ही  नर्मदा जी हैं | ऐसे सुंदर भव्य परिसर, दृश्य  ,शांत वातावरण , मन करता है  यहीं रुक जाएँ | माँ से हर जगह प्रार्थना कर रहे थे , माँ दुबारा फिर अवसर देना |

चांदोद

बदरिका आश्रम से  चांदोद (चाणोद)  गए , वहां भी नर्मदा जी है | इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है | प्रातः नारेश्वर में नर्मदा स्नान किया था , किन्तु यहाँ माँ की विशालता देख कर पुनः मन हुवा और स्नान किया , नमन किया | चांदोद में   शेष नारायण, बालाजी , आदि कई मंदिर हैं ऋणमुक्तेश्वर ,कपिलेश्वर महादेव  के दर्शन किया  | यहाँ सात तीर्थ – चंड आदित्य ,चंडिका देवी, चक्रतीर्थ (कहते हैं तालमेघ दैत्य को मारकर भगवान विष्णु ने यहाँ नर्मदाजी में अपना चक्र धोया था ), कपिलेश्वर, (कपिल भगवान ने तप किया था ) ऋणमुक्तेश्वर ,पिंगलेश्वर (अग्नि देवता ने तप किया था ) और  नंदाल्हद हैं |

कपिलेश्वर महादेव मंदिर चांदोद

करनाली

चांदोद से करनाली जहाँ ओर नदी का नर्मदा जी में संगम होता है – लोग पश्चिम प्रयाग भी कहते हैं | सोमेश्वर तीर्थ है | कुबेर भंडारी , नर्मदा माँ  व अग्नि देब भगवान  सूर्य देव का मंदिर है | बड़े बड़े परिसर साफ सुथरे  , आवास सुविधा  और भोजन की व्यवस्था , देखकर मन प्रसन्न हो जाता है |

त्रिवेणी संगम करनाली

तिलकवाडा

फिर तिलकवाडा , मणि नदी के किनारे है , यहाँ गौतम ऋषि ने तप किया था, मणितीर्थ कहा जाता है | तिलकवाडा में वासुदेवानंद सरस्वती मंदिर में दर्शन किये , जो रंग अवधूत स्वामीजी  के गुरु थे | यहाँ की  भव्यता , सौन्दर्य आज भी मन मस्तिष्क पर अंकित है | गरुडेश्वर के लिए प्रस्थान किया |

तिलकवाडा

नारेश्वर से गरुडेश्वर लगभग 150 किमी की यात्रा , मार्ग में सभी दर्शन करते हुवे लगभग 8 घंटों में पूरी की | गरुडेश्वर में श्री दत्तात्रेय मंदिर और स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वतीजी  की समाधी भी है | स्वामी कार्तिक की तपो भूमि – कुमारेश्वर तीर्थ है | श्री दत्त संस्थान में नई और पुरानी विंग  में न्यूनतम पेमेंट पर सुंदर सुविधाजनक आवास एसी नान एसी कमरे , बड़े बड़े हाल 4 से 6 पलंग लगे हुवे उपलब्ध हैं | रात्रि में मंदिर में ही स्वादिष्ट गर्म भोजन प्राप्त किया  | पूरा संस्थान नर्मदा जी के तट पर ही है |

आज नारेश्वर  (11.30 ) गरुडेश्वर (7.30)  लगभग 150 किमी, वाया मालसर, अनुसूया , बदरिका आश्रम , चाणोद , करनाली , , तिलकवाडा     रास्ता: अच्छा है भोजन : श्री रंग अवधूत आश्रम रात्रि विश्राम व् भोजन : श्री दत्त सेवा संस्थान , गरुडेश्वर

विशेष : ग्यारवें दिन का विवरण 3.8.19 को देखिये