account – day 2
दूसरा दिन 18.2.18 रविवार महाराजपुर से पिपरिया
संगम घाट पर माँ नर्मदा दर्शन, पूजन
महाराजपुर के विश्राम भवन में सभी प्रकार की सुविधाएं थीं . प्रातः स्नान , जलपान इत्यादि करने के बाद नर्मदाजी दर्शन पूजन के लिए संगम घाट पर गए. कल जब बिछिया से आ रहे थे तो एक नदी को लांघने के पहले जानकारी की | यह नर्मदाजी नहीं बल्कि बंजर नदी थी |महाराजपुर में बंजर का नर्मदा जी में संगम हो जाता है |

संगम घाट साफ सुथरा और अच्छा बना हुवा है. अम्बुदेश्वर महादेव का मंदिर भी हैं ; नर्मदा जी का पाट चौड़ा था ,जल की कमी होने के कारण घाट से नीचे सीढ़ियों से उतरने के बाद भी नर्मदाजी काफी दूर थीं |
हमने श्रीफल भेंट किया, पूजा अर्चना नर्मदा अष्टकम का पाठ किया.वहां उपस्थित लोगो को प्रसाद वितरण भी किया.

महाराजपुर का पुराना नाम सरस्वती प्रणव तीर्थ है | कहते है, यहाँ सरस्वती देवी ने तपस्या की थी |
संगम से लौटते समय गुरुद्वारा भी देखा. विश्राम के लिए हॉल है और कामन लेट्रिन बाथरूम है , साफ और सुविधाजनक है. यहाँ भी रुका जा सकता है |
महाराजपुर से नर्मदाजी की शहस्त्रधारा जो मंडला में है , कहा जाता है यहाँ सहत्रार्जुन ने अपनी भुजाओं से नर्मदाजी के प्रवाह को रोका था, के दर्शन के लिए नर्मदाजी को लांघना पड़ता , इसलिए शहस्त्रधरा का दर्शन से वंचित रह गए. माँ की जब इच्छा होगी, ये दर्शन भी करा देगी . अब घन्सोर से होते हुवे पिपरिया जाना है |
महाराजपुर से सुबह 10.30 को प्रस्थान किया . घन्सोर ,लखानादोंन, नरसिंगपुर और करेली , लगभग 174 किलोमीटर का सफर तय कर 1.30 बजे करेली पहुँचे | शुद्ध शाकाहारी भोजनालय पूछने पर, हम परिक्रमावासी हैं , यह जानकर एक सज्जन ने, गाडरवाडा रोड पर प्रिंस होटल तक स्वयम आगे चलकर रास्ता बताया | ढाबा शुद्ध शाकाहारी और अच्छा भोजन और साफ सुथरा था. गुजरात से आये हुवे परिक्रमावासी जो अपने वाहनों से यात्रा कर रहे थे , वहां भोजन कर रहे थे |

भोजन के बाद वहां से गाडरवाडा , रास्ते में एक स्कूल में थोडा विश्राम किया और फिर शाम 5 बजे पिपरिया पहुँचे | महाराष्ट्र व राजस्थान से आये हुवे ठेकेदार गन्ने के खेतों से बैल गाड़ियों से गन्ने शक्कर मिलों में पहुंचा रहे थे | गाडरवाडा से रास्ता सिंगल है, इसके कारण भी समय अधिक लगा.
पिपरिया में , माहेश्वरी भवन, अलका होटल, अशोक होटल, गीतांजलि सभी स्थानों में शादी ब्याह के कारण कमरे उपलब्ध नहीं थे. रेलवे स्टेशन के पास लकी पैलेस होटल में रात्रि विश्राम किया, जबलपुर से बेटी रानी , दामाद आनंद बाबू भोजन ले कर आ गए थे. 2 घंटे बाद वे वापस लौट गए |
आज महाराजपुर (10.30 बजे) से पिपरिया ( 5 बजे संध्या ) ,लगभग 260 किमी वाया घन्सोर, लखानादोंन, नरसिंगपुर, करेली , गाडरवारा, दोपहर भोजन : प्रिंस ढाबा शुद्ध शाकाहारी करेली रात्रि विश्राम : होटल लकी पेलेस, रेलवे स्टेशन के पास रास्ता: गाडरवारा से पिपरिया सिंगल रोड , बैल गाडियों की भरमार डीज़ल – महाराजपुर
