account – day 5
नर्मदा परिक्रमा – पांचवां दिन – 21 फरवरी 18 बुधवार : ममलेश्वर से बडवानी नर्मदा जी : ब्रम्हपुरी घाट दर्शन , ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन पूजन , गोमुख : दर्शन , ग्राम तेली भटयन में पुनः दर्शन, बडवानी : स्नान,
आज सुबह ब्रम्हपुरी घाट पर पुनः नर्मदा माँ का दर्शन नमन किया | पश्चात ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में पंडित सुधिर अत्रे जी ने ज्योतिर्लिंग का शांति के साथ विधि पूर्वक रुद्राभिषेक कराया | खूब आनंद आया | जैसे ही पूजा के पश्चात पंडितजी प्रसाद दे रहे थे , मन में आया की स्वयं बाबाजी प्रसाद दे रहे हैं, प्रसाद हाथ में ही था कि बाबाजी का फोन आया – पूछा- सारडा जी कहाँ हो- “ मैंने उत्तर दिया – बाबाजी ममलेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक के बाद आप ही तो आशीर्वाद और प्रसाद देरहे हैं “ फिर बाबाजी की चिर परिचित हंसी | ऐसी कृपा है बाबाजी की | सर्वज्ञ और सर्वत्र हैं बाबाजी | फिर पूछा यात्रा कैसी चल रही है ? मैंने उत्तर दिया – बहुत अच्छा लग रहा है , आपकी कृपा है |

रुद्राभिषेक के बाद गोमुख पहुँच कर वहां माँ का पूजन किया | प्रसाद ,दक्षिणा वितरण किया | नियमानुसार नर्मदाजी का जो जल माई की बगिया से लाये थे , उसमे से थोडा यहाँ गोमुख में अर्पण किया , और गोमुख से थोडा जल उसी पात्र में फिर भरा |

गोमुख में जल अर्पण 
गोमुख
गोमुख से बाहर आये तो बहुत से बच्चे थे | पुष्पा ने कुछ बच्चों को वस्त्र पहनाये | मैंने कहा – कपड़े दे दो , पहनाना क्या ज़रूरी है ? उसने जो उत्तर दिया वो आज भी याद है – कहा – “ पहली बार पहनाये तब से ऐसा लग रहा है कि नर्मदाजी के बाल स्वरूप को पहना रही हूँ और पहनाना अच्छा लग रहा है | ” बच्चों को नोटबुक, बिस्किट, चाकलेट भी वितरण किया |
ऐसा नहीं है कि सिर्फ हमने ही बच्चों को कुछ दिया हो, प्रायः सभी परिक्रमावासी बच्चों को वस्त्र, नोटबुक, बिस्किट मिठाई कुछ न कुछ देते ही हैं, | लेकिन बच्चों में जिसको जो मिला उसकी प्रसन्नता किसी दुसरे से कम नहीं थी | उन की एक फोटो में उन सब की मुस्कराहट, प्रसन्नता यह संकेत करती है कि जिसको जो मिला उसी में वे खुश हैं , किसी से कोई शिकायत नहीं | और एक हम हैं , बहुत कुछ होते हुवे भी , संपन्न होते हुवे भी ईर्ष्या लालच कम नहीं होता | और अधिक मिल जाये , और अधिक जमा कर लें – संग्रह की प्रवृत्ति कम नहीं होती |

फिर ममलेश्वर में ही , भक्तनिवास के सामने कुबेर भंडारेश्वर , सिद्ध गणेशजी और हनुमान जी के मंदिर में दर्शन नमन किये | भक्तनिवास में ही भोजन कर लगभग 12 बजे बडवानी के लिए प्रस्थान किया | वाया सनावद , पिपलगांव, कसरावद ,अंजड – बडवानी की दुरी 170 किमी है |

कुबेर भण्डारेश्वर 
भक्त निवास
ग्राम भटियान तेली
ममलेश्वर से लगभग 50 किमी पिपलगांव आने का बाद , 1.30 बजे मार्ग में एक बड़ा बोर्ड “ सियाराम बाबा की जय “ देखा | रुक कर जानकारी ली | बताया गया कि मुख्य सड़क से 15 किमी अंदर ग्राम भटियान तेली में नर्मदा जी हैं और वहीँ संत सियाराम बाबा का दर्शन भी हो जायेगा | तब याद आया की कल रात्रि भक्त निवास में गुजरात से आये एक परिवार ने कहा थी कि आप कार से जा रहे हैं तो रास्ते में बाबा सियाराम के दर्शन अवश्य करें | 15 किमी चलने से पुनः माँ नर्मदा का नए रूप में दर्शन नमन करने का सोभाग्य मिला है ,तो अवश्य करेंगे | हम चले गए | शांत , वातावरण, खूब चौड़ा पाट ,एक नाव , गाँव के लोग , माँ को प्रणाम किया | स्थान बड़ा सुंदर मनोरम लगा | नहीं जाते और बाद में जानकारी मिलती तो अफ़सोस होता | जल में जा कर नमन किया , श्रीफल भेंट किया |
लोगों ने कहा – नर्मदा परिक्रमा पर हैं तो सामने ही बाबा सियाराम जी हैं , दर्शन कर लेवें | सच बात तो ये है कि पूज्य बाबाजी के अतिरिक्त किसी अन्य संत के दर्शन या चरण स्पर्श करूं – ऐसी न तो कभी इच्छा हुई ,न कभी मन ने आग्रह किया, और न करने का कभी अपराध बोध भी नहीं हुवा, किसी का अनादर करना है ऐसी भावना भी नहीं रही | बस मन नहीं करता था | इसलिए दर्शन की कोई विशेष उत्कंठा न होने पर भी लगा कि संत हैं , आ ही गए तो दर्शन कर लेने में कोई हर्ज नहीं है |
वहीँ पर तीन मंजिले मकान में , बाबा सियारामजी का आश्रम है | भूतल के कमरे में लगभग 25 महिला पुरुष बच्चे बैठे थे , जिनको एक व्यक्ति दोनों हाथों से प्रसाद बाँट रहा था | हमें बैठने के लिए कुर्सियां दीं | उपर तीसरी मंजिल में बाबा से मिलने गए | लगभग 85 वर्ष के वृद्ध , कमर पूरी झुकी हुई, पुरे शरीर में . पतले सफ़ेद वस्त्र की सिर्फ एक लंगोट के सिवा कुछ नहीं | हमसे परिचय पूछा , हमारे साथ ही नीचे आये और हम तीनो को अलग अलग ढेर सारा प्रसाद जिसमे मीठा, नमकीन, मूरी इत्यादि थे, दिया | दक्षिणा भेंट कुछ भी लेने से इंकार कर दिया |

तेली भटयान 
बाबा सियारामजी 
नर्मदाजी
फिर एक नया अनुभव हुवा | पूज्य बाबाजी के पास जो भी संत सन्यासी महात्मा आते हैं ,बाबाजी सबको सन्मान स्नेह देते हैं | पर शिष्य सेवक भी वैसा ही करें , ऐसा कुछ नहीं कहते | गृहस्थों में किसी सदस्य को कोई व्यसन है, परिवार के लोग बाबाजी से निवेदन करते हैं कि बाबाजी उसे समझाइये | बाबाजी किसी से कुछ नहीं कहते , बस इतना ही कहते हैं माँ जब चाहेगी छोड़ देगा | और मैंने इन 30 वर्षों में इस बात को सत्य होते देखा है | गूढ़ बात यह है कि व्यक्ति स्वयम अपने विवेक से समझे करे तभी वह स्थायी होता है | जब बाबाजी की कृपा होती है तो विवेक भी जागृत हो जाता है |
बाबाजी की कृपा बरसती रहे , प्रकाश और दिशाएं अपने आप मिलेंगी |

ग्राम : मंडवाडा
तेली भटयान से लौट कर वापिस मुख्य मार्ग पर आ गए | कसरावद से ठीकरी के रास्ते पर निमरानी ग्राम में इंडस्ट्रियल एरिया है | रास्ता बहुत अच्छा है | ग्राम अंजड पहुँचने के पूर्व ग्राम मंडवाडा में रास्ते में ही एक भव्य शिव मंदिर देखा, साथ ही पुराना मंदिर भी है | नहाली और कुण्डी नदी का संगम है, परिक्रमावासियों के लिए सदाव्रत की व्यवस्था भी है | नीम , पीपल और बड तीनो पेड़ों का एक साथ संगम भी है | एक सज्जन वहां बैठे थे , बताया की यह ज़मीन उन्ही की है ,निर्माण भी कराया और अब देख रेख करते हैं | उनका व्यवसाय भी है , वहां भी समय देते हैं

बड पीपल नीम 
शिव मंदिर मंडवाडा
बड़वानी
संध्या 5 बजे बड़वानी पहुँच गए | यहाँ से 4 किमी पर राजघाट है | वहां नर्मदाजी का पाट बहुत चौड़ा है | जगह जगह बांध बनने के कारण जल स्तर तो कम हो गया , परन्तु माँ के प्रवाह को कौन रोक सका है | सबकी प्यास बुझाती, तृप्त करती , कृपा करती अविरल गतिमान रही है और रहेगी | हंडिया की तरह यहाँ चट्टानें नहीं थी |

नर्मदाजी 
राजघाट , संध्या काल में हम सभी ने स्नान लाभ लिया, पूजा की , प्रसाद वितरण किया | दीप दान (प्रवाह )भी किया | पंजाब हरियाणा की गाडियों से परिक्रमावासी व संत आये हुवे थे और वे भी स्नान कर रहे थे |

राजघाट पर पूजन 
दीप प्रवाह

सांवरिया सेठ का मंदिर 
सांवरिया ढाबा
आज ममलेश्वर (12 बजे) से बडवानी (5.00 बजे). लगभग200 किमी वाया सनावद, पिपलगांव, ग्राम भाटियान तेली, कसरावद , मंडवाडा ठीकरी अंजड से बड़वानी , रास्ता: अच्छा जलपान व दोपहर भोजन: भक्त निवास रात्रि भोजन : सांवरिया ढाबा शुद्ध शाकाहारी बहुत अच्छा रात्रि विश्राम: होटल सत्कार , बडवानी डीज़ल : बड़वानी
