Chronicle – 9 Narmada Parikrama

account – day 7 , 23.2.18 शुक्रवार

शाहदा से पानेथा आश्रम

प्रकाशा में श्री दगडू महाराज सत्संग भवन , नर्मदाजी ( जल का ) पूजन

शाहदा से 9.30 बजे प्रस्थान कर 15  किमी दूर प्रकाशा पहुँचे |हाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की शाहदा तहसील प्रकाशा गाँव ,तापी नदी के किनारे बसा है |इसे दक्षिण काशी भी कहा जाता है |

गंधर्वराज पुष्पदंत को  बिना अनुमति के बगीचे से शिव पूजा के लिए पुष्प तोड़ने के अपराध के कारण राजा ने कारावास का दंड दिया | कारावास में ही अत्यंत दीन हीन विवश होकर  भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए   शिव लिंग की स्थापना कर गन्धर्वराज पुष्प दन्त ने एक  स्तोत्र  रचा | भगवान शिव प्रसन्न  हुवे | वही स्तोत्र शिव महिम्न स्तोत्र के नाम से जाना जाता है | पूरे भारत में पुष्प दंतेश्वर का एक ही मंदिर है जो प्रकाशा में है |

पुष्प दंतेश्वर मंदिर

प्रकाशा में केदारेश्वर ,दक्षिण काशी  के मंदिर भी हैं | संत श्री दगडू महाराज जी सत्संग भवन है जहाँ ,अखंड राम धुन ,भजन चल रहे हैं | पूजा  स्थल सभी एक ही विशाल परिसर में हैं | वहीँ माँ नर्मदाजी ( जल ) का पूजन, आरती प्रसाद वितरण किया |

पास में ही माँ  अन्नपूर्णा जी का मंदिर का भी दर्शन किया | भगवान् शिव और माँ अन्नपूर्णा के  बहुत ही  सुंदर विग्रह हैं |

माता अन्नपूर्णा मंदिर

तलोदा, अक्कलकुवा , सागबारा होते हुवे , प्रकाशा से  लगभग 100 किमी दूर डोडियापारा, और वहां से रोड से 10 किमी अंदर देव मोगरा 1.45  बजे पहुँचे | यहाँ  पांडवों की माता कुंती का एकमात्र मंदिर है | शिवरात्रि के समय यहाँ मेला लगता है | अभी भी काफ़ी भीड़ थी | यहाँ देवी को धान चढ़ाया जाता है  और प्रसाद में वापिस धान ही दिया जाता है | यहाँ का धान कभी समाप्त नहीं होता , ऐसी मान्यता है |

कुंती माता का मंदिर – देव मोगरा

देव मोगरा दर्शन के बाद वापिस डोडियापारा से अंकलेश्वर रोड पर 4 किमी पर शिवम पार्क शाकाहारी होटल में भोजन के बाद , डोडियापारा से 46 किमी राज पीपला और वहां से  लगभग 40 किमी शूल पाणेश्वर  के लिए प्रस्थान किया |

देव मोगरा

 शूल पाणेश्वर की झाडी और पुराना मंदिर सरदार  सरोवर बाँध में डूब गए | बांध नर्मदा तट पर ही है, वहीँ से माँ नर्मदा का दर्शन नमन किया | शूल पाणेश्वर  का नया मंदिर बना है | पूज्य बाबाजी के शिष्य त्रिवेदीजी वहां पूजा इत्यादि व्यवस्था देखते हैं |

शूल पाणेश्वर नया मंदिर

फिर वहां से राज पीपला में, हरसिद्धि माता, कुम्भेश्वर महादेव ,शनि मंदिर, छोटी मोटी पनावटी मंदिर में दर्शन किये | करीब 15 किमी पर पोइचा में  स्वामी नारायण का मंदिर भी है , बहुत बड़ा परिसर और भव्य मंदिर दर्शनीय है | पूरा देखने के लिए कम से कम 4 घंटे का समय चाहिए था | हमें आज पानेथा आश्रम पहुँचना था, इसलिए वहां से रवाना हो गए |

पानेथा के लिए राजपीपला से उमल्ला 25 किमी और उमल्ला से 15 किमी अंदर नर्मदाजी के तट पर पानेथा में पूज्य बाबाजी का  “ मैकल सुता कल्याण आश्रम “ है | ह्र्य्दियेश मुनि जी वहां की व्यवस्था देखते हैं | उन्हें  सुचना मिल गई  थी | अँधेरा हो गया था , हम सुगमता से  आश्रम तक पहुँच सकें  इसलिए  ह्र्य्दियेश मुनि जी ने एक प्रतिनिधि भेज दिया था | रात्रि 9.15  बजे आश्रम पहुँचे | आश्रम में भोजन और रात्रि विश्राम किया | सारी व्यवस्था कर दी गई थी |

प्रातः देखा कि नर्मदा जी के तट पर ही ,लगभग 12 एकड़ में केले और गेहूं की खेती भी है | आश्रम में  मंदिर और कई कमरे हैं , गौशाला भी है | सुन्दर वातावरण प्रदुषण मुक्त है | बहुत अच्छा लगा | नर्मदा जी को प्रणाम किया | आश्रम में पूजन किया | वाहन से परिक्रमा करने वाले प्रायः पानेथा आश्रम नहीं जाते  |

आज शाहदा (9 बजे) से पानेथा – (रात्रि 9 बजे) लगभग 290 किमी, वाया प्रकाशा तलोदा, अक्कलकुवा साग्वारा, देव मोगरा, दोदियापारा, राजपिपला, शूल पाणेश्वर     रास्ता: अच्छा है जलपान :प्रकाशा, दोपहर भोजन : शिव पार्क होटल (अंकलेश्वर रोड)  रात्रि भोजन व विश्राम : मैकल सुता कल्याण आश्रम -पानेथा आश्रम . डीज़ल – राजपिपला      

विशेष: आठवें दिन का विवरण 2 .8.19 को देखिये