Chronicle – 8 Narmada Parikrama

account – day 6

नर्मदा परिक्रमा छठवां दिन – 22.2.18 गुरुवार : बडवानी से शाहदा

सप्त श्रृंगी देवी मंदिर शाहदा में नर्मदाजी ( जल का ) पूजन

सुबह बडवानी से 9 बजे प्रस्थान किया | 8 किमी पर जैन तीर्थ बावनगजा में रुक कर दिगम्बर भगवान आदिनाथ की 84 फीट ऊँची प्रतिमा का दर्शन नमन किया | काफ़ी विशाल परिसर है, रहने के लिए सुविधा जनक कमरे ,भोजनशाला सभी कुछ है | अग्रिम सुचना पर कमरों की बुकिंग हो जाती है |

जैन तीर्थ बावनगजा का विशाल परिसर

इसे सिद्ध क्षेत्र  चूलगिरि भी कहा जाता है | 850 सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद चूलगिरी सिद्ध पर्वत के दर्शन होते हैं  | बताया गया कि वहां रावण का भाई कुंभकर्ण और पुत्र इन्द्रजीत ने तपस्या की थी | कुंभकर्ण के पद चिन्ह भी हैं | हम ऊपर तो नहीं गए | लगभग डेढ़ घंटे तक परिसर में ही रहे ,वहीँ कैंटीन में जलपान किया  |

शाहदा के लिए (वाया पाटी सिलावाद निवाली, खेतिया ) प्रस्थान किया | बडवानी से लगभग 110 किमी के बाद दोपहर को खेतिया पहुँचे |

तोरनमाल – महाराष्ट्र का एक हिल स्टेशन
वहां जानकारी मिली कि खेतिया से 30 किमी पर महाराष्ट्र का हिल स्टेशन है – तोरंणमाल | वैसे तोरनमाल नर्मदाजी की परिक्रमा में नहीं है , किन्तु हमने विचार किया कि महाराष्ट्र का हिल स्टेशन है , एक रात्रि यहाँ रुक सकते हैं |

तोरनमाल जाने के रास्ते में दोनों ओर सूखा था ,कोई हरयाली नहीं थी | मिटटी के पहाड़ थे , दर्शनीय जैसा कुछ भी नहीं था | तोरनमाल में आज बाज़ार था  | वन विभाग के गेस्ट  हाउस बने हैं , अभ्यारण्य भी है | हमने नीचे ही वन विभाग से कमरा बुक करवा लिया था , किन्तु ऊपर पहुँचने के बाद  एक रात रुका जाये ऐसा कुछ लगा नहीं | गर्मी भी थी | केवल एक बड़ी झील है – यशवंत झील | बाज़ार होने के कारण अस्थाई दुकाने लगी थी , केवल शाकाहारी भोजन की भी कुछ ठीक व्यवस्था नहीं थी | जो भी रेस्टारेंट थे उनको देखकर कुछ भी खाने का मन नहीं हुवा | यहाँ उल्लेखनीय है कि 1 बजे , खेतिया में , गुरुकृपा शुद्ध शाकाहारी भोजनालय में भोजन तैयार था ,फिर भी वहां भोजन  नहीं किया | कहते हैं परोसी हुई थाली छोड़ना नहीं चाहिए और जहाँ भोजन मिलता है  भगवान का प्रसाद समझ कर अवश्य कर लेना चाहिए | अंततः आज दोपहर का भोजन नहीं हुवा |

तोरणदेवी का एक छोटा सा मंदिर काफ़ी ऊंचाई पर था | वहां गाड़ी नहीं जाती | तोरनमाल में गुरु गोरखनाथजी ने तपस्या की थी | उनके मंदिर में दर्शन किये | वहां के महात्माजी पूज्य बाबाजी को अच्छी तरह जानते हैं और उनका सन्मान करते हैं | उन्होंने रुकने व भोजन के लिए कहा , किन्तु हम नहीं रुके |   तोरनमाल से खेतिया वापसी मार्ग पर 3 किमी पर गुरु गोरखनाथ जी के गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जी के मंदिर है | वहां  दर्शन कर ले, इस विचार से आगे बढे |  | रास्ता बहुत ख़राब था , टायर पंचर हो गया था | ठीक करने की कोई व्यवस्था भी नहीं थी | मत्स्येन्द्रनाथ जी के  मंदिर दर्शन नहीं कर सके | क्षमा मांगते हुवे  वहीँ से नमन किया |

तोरनमाल से शाहदा 50 किमी  है , खेतिया तक नहीं जाना पड़ता, पहले ही रास्ता कट जाता है | वहां रास्ते में  गन्ने के रस के लिए रुके | ठेले वाले को 3 गिलास गन्नें के रस का जब पैसे देने लगे तो उसने बताया कि पास खड़े एक युवक ने पैसे दे दिये हैं | वह युवक बिलकुल नहीं माना , कहा कि आप लोग परिक्रमा वासी हैं , हमारा अधिकार बनता है | परिक्रमावासीयों के प्रति  ऐसा प्रेम , आदर . आग्रह कई जगह  अनुभव हुवा |

शाहदा में मध्यम श्रेणी का शाकाहारी होटल जैन प्लाजा के  सामने ही गणपति टायर्स से नया  टायर बदलवाया | वहीँ पर इनकी भी नई होटल है | सामने ही सप्त श्रृंगी देवी का बड़ा मंदिर है | उसी मंदिर में साथ में लाये नर्मदाजी के जल का  पूजा नमन ,प्रसाद वितरण किया | रात्रि विश्राम जैन प्लाजा में किया | महाराष्ट्र से एक बस में परिक्रमावासी थे , वे भी वहीं रुके थे , भोजन की व्यवस्था उनकी स्वयं की थी | भोजन के बाद उन लोगों  ने सामूहिक भजन भी किया |

आज बडवानी( 9 बजे) से  शाहदा (4 बजे). लगभग 215 किमी, वाया  बावनगजा पाटी,  सिलावाद ,खेतिया (खेतिया से तोरनमाल का रास्ता ठीक नहीं) जलपान : बावनगजा   रात्रि भोजन व विश्राम : जैन प्लाजा , शाहदा डीज़ल : बड़वानी

विशेष : सातवें दिन का विवरण 26.7.19 को देखिये

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