Chronicle -5 Narmada Parikrama

account – day 3

नर्मदा परिक्रमा – तीसरा दिन – सोमवार : पिपरिया से हरदा

नर्मदाजी – सांगाखेड़ा :  होशंगाबाद – स्नान, पूजन  , हंडिया में पुनः दर्शन स्नान पूजन , परिक्रमा वासियों के दर्शन

पिपरिया में नर्मदाजी नहीं है. सुबह स्नान के बाद 8.30 बजे होशंगाबाद के लिये प्रस्थान किया |

जानकारी मिली कि पिपरिया से लगभग 35 किमी  पर सेमरी ग्राम से 14 किमी अन्दर सांगाखेड़ा ग्राम है , वहां नर्मदाजी हैं | मन हुवा चलो ,माँ के दर्शन सांगाखेड़ा में भी करेंगे |

वहां छोटे छोटे स्टाल लगे थे | दुकानदार ने कहा – बाबूजी नारियल ले जाइये | पूछा – कितने का ? बताया – बीस रूपये का | मैंने बुद्धिमता पूर्वक कहा – पहले ही मालूम था , महंगे मिलेंगे , इसलिए 25 नारियल थोक भाव में खरीद कर ही रवाना हुए थे | यह सुनकर दुकानदार हँस दिया | उसकी हंसी स्मृति से गई नहीं , कुछ समय बाद परिक्रमा के दौरान ही उसकी हंसी का अर्थ जब समझ में आया तो अपने आप पर क्षोभ हुवा , कसक आज भी है |

हमने दर्शन , आचमन, नमन , किया | जल कम लेकिन  बिलकुल साफ , खूब चौड़ा पाट , सुन्दरता देखते ही बनती थी |

सांगाखेड़ा में दर्शन

वहां बच्चे थे जिन्हें वस्त्र, बिस्किट  दिये | दिया तो बहुत थोड़ा लेकिन बच्चे इतने में ही बहुत खुश प्रसन्न थे | और एक हम हैं , बारीक़ बारीक़ अर्थहीन बचत के लिए प्रयत्न करते रहते हैं , जितना मिलता है , मिलने की प्रसन्नता तो दूर और अधिक  पाने की लालसा बढ़ती जाती है | पुष्पा ने तो बच्चों को ड्रेस पहनाये भी. उसको  बहुत भी प्रसन्नता हो रही थी | बाद में तो सभी जगह  उसने बच्चों को खुद ही ड्रेस पहनाये | बच्चों की ख़ुशी  देखकर सब को बहुत अच्छा लग रहा था | कुछ नया अहसास हो रहा था | माँ की परिक्रमा के पहले इस प्रकार का अहसास कभी नहीं हुवा था |

रास्ते में बबई ग्राम में इन्दोरी होटल में पोहा समोसा जलेबी का जलपान किया ,10.15 बजे प्रस्थान किया | पुरे मार्ग में दोनों तरफ हरियाली  , रास्ता अच्छा , लगभग 12 बजे दोपहर को होशंगाबाद पहुँचे |होशंगाबाद में  नर्मदाजी के  किनारे  कई मंदिर हैं , मुख्य मंदिर हैं- जगन्नाथजी, बलदाउजी , हनुमान जी, रामचन्द्रजी, महादेवजी और शानिदेवजी  |

सेठानी घाट

स्नान के लिए सेठानी घाट पहुँचे . काफी  बड़ा , प्रसिद्द घाट है , साफ सुथरा ,वस्त्र बदलने की व्यवस्था है. अनेकों स्त्री पुरुष स्नान कर रहे थे | सेठानी घाट – नाम के अनुरूप यहाँ जल और प्रवाह में कोई कृपणता नहीं थी | स्नान करने वाले अधिक गहराइ  में न जा सकें इसलिए सुरक्षा के लिए पोल और चैन लगी हुई थी |  सुरक्षित क्षेत्र में ही   माँ की गोद में स्नान , फिर पूजन, प्रसाद व दक्षिणा वितरण किया.

सेठानी घाट

लगभग २ बजे होशंगाबाद से हरदा के लिए प्रस्थान किया . 47 किमी सिवनी मालवा में नए होटल सेलिब्रेशनमें शुद्ध शाकाहारी भोजन किया | भोजन साधारण था , सब्जी और दाल में रंग डालकर आकर्षित करने के प्रयास ने सब्जी दाल का स्वाद बिगाड़ा , और महंगा भी था | फिर 27 किमी पर टिमरनी में गुजरात से वेन में आये परिक्रमा वासियों से भी भेंट हुई. लगभग 5 बजे हरदा पहुँचे | हरदा से 20 किमी पर हंडिया जाकर नर्मदा जी का पुनः दर्शन ,नमन किया | जल राशी बहुत ही कम थी , चट्टानें बहुत ज्यादा थी |

नर्मदा परिक्रमा में हंडिया का विशेष महत्व है | यहाँ रिद्धनाथ जी का जीर्ण शीर्ण मंदिर है | कहा जाता है यहाँ कुबेर जी ने तप किया था |

रिद्धनाथ मंदिर हंडिया

बहुत बड़ा पुल भी  है जो हंडिया के दूसरी ओर नेमावर को  जाता है |  परिक्रमा में लौटते हुवे दुसरे तट पर नेमावर के दर्शन होंगे | नेमावर को  जमदग्नि ऋषि की तपोभूमि मानते हैं | नर्मदा जी में सूर्य कुंड है जो गर्मी में दिखता है | कुंड में शेषशायी भगवान की मूर्ति है |

इस स्थान को नर्मदाजी का नाभिस्थान मानते हैं |  नाभि स्थल तो शांत होना ही चाहिए. इतनी शांति कि जल में पूरी परछाई स्पष्ट दिख रही थी | अँधेरा होते तक शांति का आनंद लेते रहे | यहाँ महिला पदपरिक्रमा वासियों के दर्शन भी हुवे | हरदा में पोस्ट ऑफिस के पास माध्यम दरजे का सभी सुविधाओं के साथ होटल मयूर इन में रात्रि विश्राम किया.

दुसरे तट पर नेमावर
परिक्रमावासी
प्यारे बच्चों की प्यारी मुस्कान

आज पिपरिया (8.30 सुबह ) हरदा ( 5 बजे ) लगभग 234 किमी  वाया सेमरी, सांगा खेड़ा ,बबई, होशंगाबाद , सिवनी मालवा , टिमरनी, हरदा.  हरदा से हंडिया , वापिस हरदा (7.30 बजे) रास्ता: अच्छा दोपहर भोजन : होटल सेलिब्रेशन  शुद्ध शाकाहारी सिवनी मालवा रात्रि विश्राम : पोस्ट ऑफिस के पास होटल मयूर इन,   निकट  शाकाहारी भोजन डीज़ल : हरदा

विशेष : चौथे दिन की जानकारी 5 जुलाई 19 को इसी स्थान पर देखिये

Chronicle -4 Narmada Parikrama

account – day 2

दूसरा दिन 18.2.18 रविवार     महाराजपुर से  पिपरिया

संगम घाट पर माँ नर्मदा दर्शन, पूजन

महाराजपुर के विश्राम भवन में सभी प्रकार की सुविधाएं थीं . प्रातः स्नान , जलपान इत्यादि करने के बाद नर्मदाजी दर्शन पूजन के लिए संगम घाट पर गए. कल जब बिछिया से आ रहे थे तो एक नदी को लांघने के पहले जानकारी की | यह नर्मदाजी नहीं बल्कि बंजर नदी थी |महाराजपुर में बंजर का नर्मदा जी में संगम हो जाता है |

संगम घाट साफ सुथरा और अच्छा बना हुवा है. अम्बुदेश्वर  महादेव का मंदिर भी हैं ; नर्मदा जी  का पाट चौड़ा था ,जल की कमी होने के कारण घाट से नीचे सीढ़ियों से उतरने के बाद भी नर्मदाजी काफी दूर थीं |

 हमने  श्रीफल भेंट किया, पूजा अर्चना नर्मदा अष्टकम का पाठ किया.वहां उपस्थित लोगो को प्रसाद वितरण भी किया.

महाराजपुर का पुराना नाम सरस्वती प्रणव तीर्थ है | कहते है, यहाँ सरस्वती देवी ने तपस्या की थी |

संगम से लौटते समय गुरुद्वारा भी देखा. विश्राम के लिए हॉल है और कामन लेट्रिन बाथरूम है , साफ और सुविधाजनक है. यहाँ भी रुका जा सकता है |

महाराजपुर से नर्मदाजी की शहस्त्रधारा जो मंडला में है , कहा जाता है यहाँ सहत्रार्जुन ने अपनी भुजाओं से नर्मदाजी के प्रवाह को रोका था, के दर्शन के लिए नर्मदाजी को लांघना पड़ता , इसलिए शहस्त्रधरा का दर्शन से वंचित रह गए. माँ की जब इच्छा होगी, ये दर्शन भी करा देगी . अब घन्सोर से होते हुवे पिपरिया जाना है |

महाराजपुर से सुबह 10.30 को प्रस्थान किया . घन्सोर ,लखानादोंन, नरसिंगपुर और करेली , लगभग 174 किलोमीटर का सफर तय कर 1.30 बजे  करेली पहुँचे | शुद्ध शाकाहारी भोजनालय पूछने पर, हम परिक्रमावासी हैं , यह जानकर एक सज्जन  ने, गाडरवाडा रोड पर प्रिंस होटल तक स्वयम आगे चलकर  रास्ता बताया | ढाबा शुद्ध शाकाहारी और अच्छा भोजन और साफ सुथरा था. गुजरात से आये हुवे परिक्रमावासी जो अपने वाहनों से यात्रा कर रहे थे , वहां भोजन कर रहे थे |

प्रिंस होटल , करेली

भोजन के बाद वहां से गाडरवाडा , रास्ते में एक स्कूल में थोडा  विश्राम किया और फिर शाम  5 बजे पिपरिया  पहुँचे | महाराष्ट्र व राजस्थान से आये हुवे ठेकेदार गन्ने के खेतों से  बैल गाड़ियों से  गन्ने शक्कर मिलों में पहुंचा रहे थे | गाडरवाडा से रास्ता सिंगल है, इसके कारण भी समय अधिक लगा.

पिपरिया में , माहेश्वरी भवन, अलका होटल, अशोक होटल, गीतांजलि सभी स्थानों में शादी ब्याह के कारण कमरे उपलब्ध नहीं थे. रेलवे स्टेशन के पास लकी पैलेस होटल में रात्रि विश्राम किया, जबलपुर से बेटी रानी , दामाद आनंद बाबू भोजन ले कर आ गए थे.  2 घंटे बाद वे वापस लौट गए |

आज महाराजपुर (10.30 बजे) से पिपरिया ( 5 बजे संध्या ) ,लगभग 260 किमी  वाया घन्सोर, लखानादोंन, नरसिंगपुर, करेली , गाडरवारा, दोपहर भोजन : प्रिंस ढाबा शुद्ध  शाकाहारी करेली रात्रि विश्राम : होटल लकी पेलेस, रेलवे स्टेशन के पास रास्ता: गाडरवारा से पिपरिया सिंगल रोड , बैल गाडियों की भरमार डीज़ल – महाराजपुर

विशेष : तीसरे दिन का विवरण 27 जून 19 को कृपया इसी स्थान पर देखिये |

Chronicle-3 Narmada Parikrama

सर्वप्रथम माता व पिता को प्रणाम जिन्होंने यह जगत दिखाया,

उसके बाद सद्गुरु महान तपस्वी वीतराग परम पूज्य बाबाजी को प्रणाम,

जिन्होंने इस  जगत को समझाया और जीवन में से अज्ञान का अंधकार हटाने की अहैतुकी कृपा की |

ACCOUNT- DAY 1 17.2.2018

शनिवार अमरकंटक से महाराजपुर

13 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व था..मै, पत्नी पुष्पा , हमारा विश्वषनीय ड्राईवर लोकनाथ , इन्नोवा कार  में  12 फरवरी को अमरकंटक आश्रम पहुँच गए थे. श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक में  अनेकों संत व् गृहस्थ भी थे .प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी शिवरात्रि के मेले में आये हुए दर्शनार्थियौं के लिए पूज्य बाबाजी की कृपा से शिवरात्रि के दिन भंडारा किया गया था.

माँ नर्मदा परिक्रमा करने की अनुमति तो सदगुरुदेव परम पूज्य तपस्वी बाबा जी से उनके रायपुर प्रवास के समय मिल ही गई थी . परिक्रमा प्रारंभ करने के पहले श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक में बाबा जी की पूजा की | पूज्य बाबाजी ने  आशीर्वाद व प्रसाद दिया | 

पूज्य बाबाजी की पूजा

पूज्य बाबाजी के निर्देशानुसार आश्रम से पूज्य राजा बाबा, अमृतानन्द जी, शांतानंदजी एवं अन्य संतों  के साथ हम माई की बगिया पहुंचे | ऐसी मान्यता है की नर्मदाजी वहां बाल रूप में खेला करती थी | वहां पंडितों ने संकल्प कराया | जेरीकेन और चूड़ीवाले छोटे लोटे (लोटी) में माँ  नर्मदाजी का जल  लिया | परिक्रमा के दौरान जिस स्थान पर  नर्मदाजी के दर्शन नहीं होते हैं ,वहां इसी रूप में माँ  की पूजा की जाती है | माई की बगिया में नर्मदा जी   की पूजा की, कढ़ाई प्रसाद (हलुवा) भोग लगाया | कन्याओं का पूजन किया , कन्याओं ने कढ़ाई प्रसाद ग्रहण किया, आशीर्वाद दिया |

माई की बगिया

माई की बगिया से संतों के साथ नर्मदा उद्गम स्थल मंदिर आ कर पूजा अर्चना कर दक्षिण तट से परिक्रमा प्रारंभ की | नियम के अनुसार नर्मदाजी हमेशा  , परिक्रमा वासी के  दाहिने हाथ की ओर होना चाहिये और नर्मदाजी को कभी भी लांघना नहीं / पार नहीं करना  चाहिये | माई की बगिया से परिक्रमा प्रारंभ करने वालों को  मुख्य मार्ग तक पहुँचने के लिए  रास्ते को समझने में थोड़ी कठिनाई होती है |  नियम में कोई  भूल चूक न हो , इसलिए राजाबाबा ने हमें नर्सरी के पास तक मुख्य मार्ग पर ला कर आगे का दिशा निर्देश दिया |

अब हम  इन्नोवा कार में  मै , पुष्पा , लोकनाथ तो थे ही, सामने की सीट पर परम पूज्य  बाबाजी  विराजमान हैं, ऐसा हमें आद्योपांत अनुभव होता रहा | माँ  नर्मदाजी हमारे दाहिने ओर थीं , उन्हें प्रणाम किया | शांत और सौम्य माँ ने आशीर्वाद दिया  , इस प्रकार दक्षिण तट से परिक्रमा प्रारंभ हुई | लगभग 1 बजे अमरकंटक से प्रस्थान किया.

अमरकंटक से डिंडोरी लगभग 90 किलो मीटर डेढ़ घंटे बाद पहुंचे | अमरकंटक से प्रस्थान करने के बाद पहली बार नर्मदा जी का दर्शन नमन किया | एयर कंडीशंड रेस्तरां और डाइनिंग  टेबल को छोड़ खुले में माँ  की गोद में ,आश्रम से साथ लाये पराठे ,  सब्जी, प्रसाद की  मिठाई पाने का आनंद लिया , बचपन याद आ गया |

नर्मदा दर्शन – डिंडोरी , भोजन घाट पर

डिंडोरी से महाराजपुर की दूरी 125 किमी है ,लगभग सवा तीन बजे महाराजपुर के लिए,  प्रस्थान किया | रास्ते में लगभग 5 बजे बिछिया में मिलन स्वीट्स में चाय पी | कार में लगे विनियर से सभी को जानकारी मिल जाती थी कि हम  परिक्रमा वासी हैं | पहली बार अनुभव हुवा की जनसाधारण के मानस में परिक्रमा वासीयों के प्रति  आदर और श्रद्धा का भाव रहता है.

महाराजपुर में रात्रि विश्राम के लिए, रामा रमण लाज की जानकारी थी, किन्तु वहां अत्यधिक भीड़ थी , सफाई की और  पानी की भी कमी थी | महाराजपुर में ही किंग फिशर होटल और रिसोर्ट नया व भव्य बना है, 1000 से 5000 रु तक कमरे हैं , किन्तु वह  शादी के लिए बुक था | मन में यह दुविधा भी थी कि परिक्रमा के दौरान इतनी  महंगी जगह में नहीं रुकना चाहिये |

पूरी परिक्रमा में पूज्य  बाबाजी मुझसे व्यवस्था व अन्य  जानकारियां  लगातार ले रहे थे | महाराजपुर में ही बेसिक सुविधाओं के साथ साधारण स्तर की  किरात धर्मशाला में 250 रू के कमरे , बुक कर , रात्रि भोजन के लिए शाकाहारी भोजनालय ढूंड रहे थे | इतने में ही अमरकंटक आश्रम से फ़ोन आया की महाराजपुर सर्किट हॉउस में व्यवस्था हो गई है |

 पूरी परिक्रमा में लगातार यह अनुभव हुवा की बाबाजी की कृपा और नर्मदा माँ का  स्नेह इतना है कि कहीं भी कोई असुविधा या ज़रा भी परेशानी नहीं हुई | कई स्थानों , आश्रमों में व मंदिरों में सहजता से  सब व्यवस्थाएं उपलब्ध होती गईं |

आज अमरकंटक ( 1 बजे ) – महाराजपुर ( 6 बजे) लगभग 230 किमी वाया डिंडोरी, समनापुर बिछिया . दोपहर भोजन : माँ नर्मदा तट डिंडोरी रात्रि विश्राम : सर्किट हॉउस महाराजपुर रात्रि भोजन : शुद्ध  शाकाहारी होटल किंगफिशर रास्ता: अच्छा

विशेष : दुसरे दिन का विवरण 20 जून 19 को इसी स्थान पर देखिये