Chronicle – 9 Narmada Parikrama

account – day 7 , 23.2.18 शुक्रवार

शाहदा से पानेथा आश्रम

प्रकाशा में श्री दगडू महाराज सत्संग भवन , नर्मदाजी ( जल का ) पूजन

शाहदा से 9.30 बजे प्रस्थान कर 15  किमी दूर प्रकाशा पहुँचे |हाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की शाहदा तहसील प्रकाशा गाँव ,तापी नदी के किनारे बसा है |इसे दक्षिण काशी भी कहा जाता है |

गंधर्वराज पुष्पदंत को  बिना अनुमति के बगीचे से शिव पूजा के लिए पुष्प तोड़ने के अपराध के कारण राजा ने कारावास का दंड दिया | कारावास में ही अत्यंत दीन हीन विवश होकर  भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए   शिव लिंग की स्थापना कर गन्धर्वराज पुष्प दन्त ने एक  स्तोत्र  रचा | भगवान शिव प्रसन्न  हुवे | वही स्तोत्र शिव महिम्न स्तोत्र के नाम से जाना जाता है | पूरे भारत में पुष्प दंतेश्वर का एक ही मंदिर है जो प्रकाशा में है |

पुष्प दंतेश्वर मंदिर

प्रकाशा में केदारेश्वर ,दक्षिण काशी  के मंदिर भी हैं | संत श्री दगडू महाराज जी सत्संग भवन है जहाँ ,अखंड राम धुन ,भजन चल रहे हैं | पूजा  स्थल सभी एक ही विशाल परिसर में हैं | वहीँ माँ नर्मदाजी ( जल ) का पूजन, आरती प्रसाद वितरण किया |

पास में ही माँ  अन्नपूर्णा जी का मंदिर का भी दर्शन किया | भगवान् शिव और माँ अन्नपूर्णा के  बहुत ही  सुंदर विग्रह हैं |

माता अन्नपूर्णा मंदिर

तलोदा, अक्कलकुवा , सागबारा होते हुवे , प्रकाशा से  लगभग 100 किमी दूर डोडियापारा, और वहां से रोड से 10 किमी अंदर देव मोगरा 1.45  बजे पहुँचे | यहाँ  पांडवों की माता कुंती का एकमात्र मंदिर है | शिवरात्रि के समय यहाँ मेला लगता है | अभी भी काफ़ी भीड़ थी | यहाँ देवी को धान चढ़ाया जाता है  और प्रसाद में वापिस धान ही दिया जाता है | यहाँ का धान कभी समाप्त नहीं होता , ऐसी मान्यता है |

कुंती माता का मंदिर – देव मोगरा

देव मोगरा दर्शन के बाद वापिस डोडियापारा से अंकलेश्वर रोड पर 4 किमी पर शिवम पार्क शाकाहारी होटल में भोजन के बाद , डोडियापारा से 46 किमी राज पीपला और वहां से  लगभग 40 किमी शूल पाणेश्वर  के लिए प्रस्थान किया |

देव मोगरा

 शूल पाणेश्वर की झाडी और पुराना मंदिर सरदार  सरोवर बाँध में डूब गए | बांध नर्मदा तट पर ही है, वहीँ से माँ नर्मदा का दर्शन नमन किया | शूल पाणेश्वर  का नया मंदिर बना है | पूज्य बाबाजी के शिष्य त्रिवेदीजी वहां पूजा इत्यादि व्यवस्था देखते हैं |

शूल पाणेश्वर नया मंदिर

फिर वहां से राज पीपला में, हरसिद्धि माता, कुम्भेश्वर महादेव ,शनि मंदिर, छोटी मोटी पनावटी मंदिर में दर्शन किये | करीब 15 किमी पर पोइचा में  स्वामी नारायण का मंदिर भी है , बहुत बड़ा परिसर और भव्य मंदिर दर्शनीय है | पूरा देखने के लिए कम से कम 4 घंटे का समय चाहिए था | हमें आज पानेथा आश्रम पहुँचना था, इसलिए वहां से रवाना हो गए |

पानेथा के लिए राजपीपला से उमल्ला 25 किमी और उमल्ला से 15 किमी अंदर नर्मदाजी के तट पर पानेथा में पूज्य बाबाजी का  “ मैकल सुता कल्याण आश्रम “ है | ह्र्य्दियेश मुनि जी वहां की व्यवस्था देखते हैं | उन्हें  सुचना मिल गई  थी | अँधेरा हो गया था , हम सुगमता से  आश्रम तक पहुँच सकें  इसलिए  ह्र्य्दियेश मुनि जी ने एक प्रतिनिधि भेज दिया था | रात्रि 9.15  बजे आश्रम पहुँचे | आश्रम में भोजन और रात्रि विश्राम किया | सारी व्यवस्था कर दी गई थी |

प्रातः देखा कि नर्मदा जी के तट पर ही ,लगभग 12 एकड़ में केले और गेहूं की खेती भी है | आश्रम में  मंदिर और कई कमरे हैं , गौशाला भी है | सुन्दर वातावरण प्रदुषण मुक्त है | बहुत अच्छा लगा | नर्मदा जी को प्रणाम किया | आश्रम में पूजन किया | वाहन से परिक्रमा करने वाले प्रायः पानेथा आश्रम नहीं जाते  |

आज शाहदा (9 बजे) से पानेथा – (रात्रि 9 बजे) लगभग 290 किमी, वाया प्रकाशा तलोदा, अक्कलकुवा साग्वारा, देव मोगरा, दोदियापारा, राजपिपला, शूल पाणेश्वर     रास्ता: अच्छा है जलपान :प्रकाशा, दोपहर भोजन : शिव पार्क होटल (अंकलेश्वर रोड)  रात्रि भोजन व विश्राम : मैकल सुता कल्याण आश्रम -पानेथा आश्रम . डीज़ल – राजपिपला      

विशेष: आठवें दिन का विवरण 2 .8.19 को देखिये

Chronicle – 8 Narmada Parikrama

account – day 6

नर्मदा परिक्रमा छठवां दिन – 22.2.18 गुरुवार : बडवानी से शाहदा

सप्त श्रृंगी देवी मंदिर शाहदा में नर्मदाजी ( जल का ) पूजन

सुबह बडवानी से 9 बजे प्रस्थान किया | 8 किमी पर जैन तीर्थ बावनगजा में रुक कर दिगम्बर भगवान आदिनाथ की 84 फीट ऊँची प्रतिमा का दर्शन नमन किया | काफ़ी विशाल परिसर है, रहने के लिए सुविधा जनक कमरे ,भोजनशाला सभी कुछ है | अग्रिम सुचना पर कमरों की बुकिंग हो जाती है |

जैन तीर्थ बावनगजा का विशाल परिसर

इसे सिद्ध क्षेत्र  चूलगिरि भी कहा जाता है | 850 सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद चूलगिरी सिद्ध पर्वत के दर्शन होते हैं  | बताया गया कि वहां रावण का भाई कुंभकर्ण और पुत्र इन्द्रजीत ने तपस्या की थी | कुंभकर्ण के पद चिन्ह भी हैं | हम ऊपर तो नहीं गए | लगभग डेढ़ घंटे तक परिसर में ही रहे ,वहीँ कैंटीन में जलपान किया  |

शाहदा के लिए (वाया पाटी सिलावाद निवाली, खेतिया ) प्रस्थान किया | बडवानी से लगभग 110 किमी के बाद दोपहर को खेतिया पहुँचे |

तोरनमाल – महाराष्ट्र का एक हिल स्टेशन
वहां जानकारी मिली कि खेतिया से 30 किमी पर महाराष्ट्र का हिल स्टेशन है – तोरंणमाल | वैसे तोरनमाल नर्मदाजी की परिक्रमा में नहीं है , किन्तु हमने विचार किया कि महाराष्ट्र का हिल स्टेशन है , एक रात्रि यहाँ रुक सकते हैं |

तोरनमाल जाने के रास्ते में दोनों ओर सूखा था ,कोई हरयाली नहीं थी | मिटटी के पहाड़ थे , दर्शनीय जैसा कुछ भी नहीं था | तोरनमाल में आज बाज़ार था  | वन विभाग के गेस्ट  हाउस बने हैं , अभ्यारण्य भी है | हमने नीचे ही वन विभाग से कमरा बुक करवा लिया था , किन्तु ऊपर पहुँचने के बाद  एक रात रुका जाये ऐसा कुछ लगा नहीं | गर्मी भी थी | केवल एक बड़ी झील है – यशवंत झील | बाज़ार होने के कारण अस्थाई दुकाने लगी थी , केवल शाकाहारी भोजन की भी कुछ ठीक व्यवस्था नहीं थी | जो भी रेस्टारेंट थे उनको देखकर कुछ भी खाने का मन नहीं हुवा | यहाँ उल्लेखनीय है कि 1 बजे , खेतिया में , गुरुकृपा शुद्ध शाकाहारी भोजनालय में भोजन तैयार था ,फिर भी वहां भोजन  नहीं किया | कहते हैं परोसी हुई थाली छोड़ना नहीं चाहिए और जहाँ भोजन मिलता है  भगवान का प्रसाद समझ कर अवश्य कर लेना चाहिए | अंततः आज दोपहर का भोजन नहीं हुवा |

तोरणदेवी का एक छोटा सा मंदिर काफ़ी ऊंचाई पर था | वहां गाड़ी नहीं जाती | तोरनमाल में गुरु गोरखनाथजी ने तपस्या की थी | उनके मंदिर में दर्शन किये | वहां के महात्माजी पूज्य बाबाजी को अच्छी तरह जानते हैं और उनका सन्मान करते हैं | उन्होंने रुकने व भोजन के लिए कहा , किन्तु हम नहीं रुके |   तोरनमाल से खेतिया वापसी मार्ग पर 3 किमी पर गुरु गोरखनाथ जी के गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जी के मंदिर है | वहां  दर्शन कर ले, इस विचार से आगे बढे |  | रास्ता बहुत ख़राब था , टायर पंचर हो गया था | ठीक करने की कोई व्यवस्था भी नहीं थी | मत्स्येन्द्रनाथ जी के  मंदिर दर्शन नहीं कर सके | क्षमा मांगते हुवे  वहीँ से नमन किया |

तोरनमाल से शाहदा 50 किमी  है , खेतिया तक नहीं जाना पड़ता, पहले ही रास्ता कट जाता है | वहां रास्ते में  गन्ने के रस के लिए रुके | ठेले वाले को 3 गिलास गन्नें के रस का जब पैसे देने लगे तो उसने बताया कि पास खड़े एक युवक ने पैसे दे दिये हैं | वह युवक बिलकुल नहीं माना , कहा कि आप लोग परिक्रमा वासी हैं , हमारा अधिकार बनता है | परिक्रमावासीयों के प्रति  ऐसा प्रेम , आदर . आग्रह कई जगह  अनुभव हुवा |

शाहदा में मध्यम श्रेणी का शाकाहारी होटल जैन प्लाजा के  सामने ही गणपति टायर्स से नया  टायर बदलवाया | वहीँ पर इनकी भी नई होटल है | सामने ही सप्त श्रृंगी देवी का बड़ा मंदिर है | उसी मंदिर में साथ में लाये नर्मदाजी के जल का  पूजा नमन ,प्रसाद वितरण किया | रात्रि विश्राम जैन प्लाजा में किया | महाराष्ट्र से एक बस में परिक्रमावासी थे , वे भी वहीं रुके थे , भोजन की व्यवस्था उनकी स्वयं की थी | भोजन के बाद उन लोगों  ने सामूहिक भजन भी किया |

आज बडवानी( 9 बजे) से  शाहदा (4 बजे). लगभग 215 किमी, वाया  बावनगजा पाटी,  सिलावाद ,खेतिया (खेतिया से तोरनमाल का रास्ता ठीक नहीं) जलपान : बावनगजा   रात्रि भोजन व विश्राम : जैन प्लाजा , शाहदा डीज़ल : बड़वानी

विशेष : सातवें दिन का विवरण 26.7.19 को देखिये

Chronicle – 7 Narmada Parikrma

account – day 5

नर्मदा परिक्रमा – पांचवां दिन – 21 फरवरी 18 बुधवार : ममलेश्वर से बडवानी नर्मदा जी : ब्रम्हपुरी घाट  दर्शन , ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन पूजन , गोमुख : दर्शन , ग्राम तेली भटयन में पुनः दर्शन, बडवानी : स्नान,

आज सुबह ब्रम्हपुरी घाट पर पुनः नर्मदा माँ का दर्शन नमन किया  | पश्चात ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में पंडित सुधिर अत्रे जी  ने ज्योतिर्लिंग का शांति के साथ विधि पूर्वक रुद्राभिषेक कराया | खूब आनंद आया | जैसे ही पूजा के पश्चात पंडितजी प्रसाद दे रहे थे , मन में आया की स्वयं बाबाजी प्रसाद दे रहे हैं, प्रसाद हाथ में ही था कि बाबाजी का फोन आया – पूछा- सारडा जी कहाँ हो- “ मैंने उत्तर दिया – बाबाजी ममलेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक  के बाद आप ही तो आशीर्वाद और प्रसाद देरहे हैं “ फिर  बाबाजी की चिर परिचित हंसी | ऐसी  कृपा है बाबाजी की | सर्वज्ञ और सर्वत्र हैं बाबाजी | फिर पूछा यात्रा कैसी चल रही है ? मैंने उत्तर दिया – बहुत अच्छा लग रहा है , आपकी कृपा है |

गर्भगृह में रुद्राभिषेक

रुद्राभिषेक के बाद गोमुख पहुँच कर वहां माँ का पूजन किया | प्रसाद ,दक्षिणा वितरण किया | नियमानुसार नर्मदाजी का जो जल माई की बगिया से लाये थे , उसमे से थोडा यहाँ गोमुख में अर्पण किया  , और गोमुख से थोडा जल उसी पात्र में फिर भरा |

गोमुख से बाहर आये तो बहुत से बच्चे थे | पुष्पा ने कुछ बच्चों को वस्त्र पहनाये | मैंने कहा – कपड़े दे दो , पहनाना  क्या ज़रूरी है ? उसने जो उत्तर दिया वो आज भी याद है – कहा – “ पहली बार पहनाये तब से ऐसा लग रहा है कि नर्मदाजी के बाल स्वरूप को पहना  रही हूँ  और पहनाना अच्छा लग रहा है | ”  बच्चों को नोटबुक, बिस्किट, चाकलेट भी वितरण किया |

ऐसा नहीं है कि सिर्फ हमने ही बच्चों को कुछ दिया हो, प्रायः सभी परिक्रमावासी बच्चों को वस्त्र, नोटबुक, बिस्किट मिठाई  कुछ न कुछ देते ही हैं, | लेकिन बच्चों में जिसको जो मिला उसकी प्रसन्नता किसी दुसरे से कम नहीं थी | उन की एक फोटो में उन सब की  मुस्कराहट, प्रसन्नता यह संकेत करती है कि जिसको जो मिला उसी में वे खुश हैं , किसी से कोई शिकायत नहीं  | और  एक हम हैं , बहुत कुछ होते हुवे भी , संपन्न होते हुवे भी ईर्ष्या लालच कम नहीं होता | और अधिक मिल जाये , और अधिक जमा कर लें – संग्रह की  प्रवृत्ति कम नहीं होती |

हमसे ज्यादा खुश कौन

फिर  ममलेश्वर में ही , भक्तनिवास के सामने कुबेर भंडारेश्वर , सिद्ध गणेशजी और हनुमान जी के मंदिर में दर्शन नमन किये | भक्तनिवास में ही भोजन कर  लगभग 12 बजे बडवानी के लिए प्रस्थान किया | वाया  सनावद , पिपलगांव, कसरावद ,अंजड – बडवानी की दुरी 170 किमी है |

ग्राम भटियान  तेली

ममलेश्वर से लगभग 50 किमी पिपलगांव आने का बाद , 1.30 बजे मार्ग में एक बड़ा बोर्ड “ सियाराम बाबा की जय “ देखा | रुक कर जानकारी ली | बताया गया कि मुख्य सड़क से 15 किमी अंदर ग्राम भटियान  तेली में नर्मदा जी हैं और वहीँ संत सियाराम बाबा का दर्शन भी हो जायेगा | तब याद आया की कल रात्रि  भक्त निवास में गुजरात से आये एक  परिवार ने कहा थी कि आप कार से  जा रहे हैं तो रास्ते में बाबा सियाराम के दर्शन अवश्य करें | 15  किमी चलने से  पुनः माँ  नर्मदा का  नए रूप में दर्शन नमन करने का सोभाग्य मिला है ,तो अवश्य करेंगे | हम चले गए | शांत , वातावरण, खूब चौड़ा पाट ,एक नाव , गाँव के लोग , माँ को प्रणाम किया | स्थान बड़ा सुंदर मनोरम लगा | नहीं जाते और बाद में  जानकारी मिलती तो अफ़सोस होता | जल में जा कर नमन किया , श्रीफल भेंट किया |

लोगों ने कहा – नर्मदा परिक्रमा पर हैं तो सामने ही बाबा सियाराम जी हैं , दर्शन कर लेवें | सच बात तो ये है कि पूज्य बाबाजी के अतिरिक्त किसी अन्य संत के दर्शन या चरण स्पर्श करूं – ऐसी न तो कभी  इच्छा हुई ,न कभी मन ने आग्रह किया, और न करने का कभी अपराध बोध भी नहीं हुवा, किसी का अनादर करना है ऐसी भावना भी नहीं रही | बस मन नहीं करता था | इसलिए दर्शन की कोई विशेष उत्कंठा न होने पर भी लगा कि संत हैं , आ ही गए तो  दर्शन कर लेने में कोई हर्ज नहीं है |

वहीँ पर तीन मंजिले मकान में , बाबा सियारामजी का आश्रम है | भूतल के कमरे में लगभग 25 महिला पुरुष बच्चे बैठे थे , जिनको एक व्यक्ति दोनों हाथों से प्रसाद बाँट रहा था | हमें बैठने के लिए कुर्सियां दीं | उपर तीसरी मंजिल में बाबा से मिलने गए | लगभग 85 वर्ष के वृद्ध , कमर पूरी झुकी हुई, पुरे शरीर में . पतले  सफ़ेद वस्त्र की सिर्फ एक लंगोट के सिवा कुछ नहीं | हमसे परिचय पूछा , हमारे साथ ही  नीचे आये और हम तीनो को अलग अलग ढेर सारा प्रसाद  जिसमे  मीठा, नमकीन, मूरी इत्यादि थे, दिया | दक्षिणा भेंट कुछ भी लेने से इंकार कर दिया |

फिर एक नया अनुभव हुवा | पूज्य बाबाजी के पास जो भी संत सन्यासी महात्मा आते हैं ,बाबाजी सबको सन्मान स्नेह देते हैं | पर शिष्य सेवक भी वैसा ही करें , ऐसा कुछ नहीं कहते | गृहस्थों में किसी सदस्य को कोई व्यसन है, परिवार के लोग बाबाजी से निवेदन करते हैं कि बाबाजी  उसे समझाइये | बाबाजी किसी से कुछ नहीं कहते , बस इतना ही कहते हैं माँ जब चाहेगी छोड़ देगा | और मैंने इन 30 वर्षों में इस बात को सत्य होते देखा है | गूढ़ बात यह है कि व्यक्ति स्वयम अपने विवेक से समझे करे तभी वह स्थायी होता है | जब बाबाजी की कृपा होती है तो विवेक भी जागृत हो जाता है |

बाबाजी की कृपा बरसती रहे , प्रकाश और दिशाएं अपने आप मिलेंगी |    

ग्राम :  मंडवाडा

तेली भटयान से लौट कर वापिस मुख्य मार्ग पर आ गए | कसरावद से  ठीकरी के रास्ते पर निमरानी ग्राम में इंडस्ट्रियल एरिया है | रास्ता बहुत अच्छा है | ग्राम अंजड पहुँचने के पूर्व ग्राम मंडवाडा  में रास्ते में ही एक भव्य शिव मंदिर देखा, साथ ही पुराना मंदिर भी है | नहाली और कुण्डी नदी का संगम है, परिक्रमावासियों के लिए सदाव्रत की व्यवस्था भी है | नीम , पीपल और बड तीनो पेड़ों का एक साथ संगम भी है | एक सज्जन वहां बैठे थे , बताया की यह ज़मीन उन्ही की है ,निर्माण भी कराया और अब देख रेख करते हैं | उनका व्यवसाय भी है , वहां भी समय देते हैं  

बड़वानी

संध्या 5 बजे बड़वानी पहुँच गए | यहाँ से 4 किमी पर राजघाट है | वहां  नर्मदाजी का पाट बहुत चौड़ा है | जगह जगह  बांध बनने  के कारण जल स्तर तो कम हो गया , परन्तु माँ  के प्रवाह को कौन रोक सका है | सबकी प्यास बुझाती, तृप्त करती , कृपा करती अविरल गतिमान रही है और रहेगी | हंडिया की तरह  यहाँ चट्टानें नहीं थी |

राजघाट , संध्या काल में हम सभी ने  स्नान लाभ लिया, पूजा की , प्रसाद वितरण किया | दीप दान (प्रवाह )भी किया | पंजाब हरियाणा की गाडियों से परिक्रमावासी व संत आये हुवे थे और वे भी  स्नान कर  रहे थे |

आज ममलेश्वर (12 बजे) से बडवानी (5.00 बजे). लगभग200  किमी  वाया सनावद, पिपलगांव, ग्राम भाटियान तेली, कसरावद , मंडवाडा ठीकरी अंजड से बड़वानी ,      रास्ता: अच्छा  जलपान व दोपहर भोजन: भक्त निवास  रात्रि भोजन : सांवरिया ढाबा शुद्ध शाकाहारी बहुत अच्छा रात्रि विश्राम: होटल सत्कार , बडवानी  डीज़ल : बड़वानी

विशेष : छठवें दिन का विवरण 19.7.19 को देखिये

Chronicle – 6 Narmada Parikrama

account – day 4

नर्मदा परिक्रमा – चौथा दिन – 20 फरवरी 2018 मंगलवार

हरदा से अमलेश्वर (ओम्कारेश्वर ) माँ नर्मदा जी : अमलेश्वर / ममलेश्वर – दर्शन

हरदा ( 9 बजे )  से  जलपान के बाद  आशापुर (70 किमी ), फिर खंडवा (40) पहुँचे | खंडवा से 25 किमी पर पंधाना रोड पर ग्राम थारवा में पूज्य बाबाजी द्वारा बनाया गया एक  नव निर्मित आश्रम है | निहालवाड़ी आश्रम के नाम से भी जाना जाता है | पूज्य बाबाजी के शिष्य निरंजनानन्द महाराज जी एवं प्रकाशानान्द महाराजजी वहां रहते हैं | हमने उन्हें पूर्व में ही आश्रम आने की सुचना दे दी थी | आश्रम बहुत ही सुंदर , बड़े बड़े कमरों और सभी सुविधाओं के साथ बना हुवा है | पर्याप्त खेत भी हैं | स्वच्छता, घने पेड़ फुलवारी शांत वातावरण  पूज्य बाबाजी की विशेष रूचि व स्वभाव में  है , इसलिए बाबाजी के सभी आश्रमों में इसका ध्यान रखा जाता है |

भोजन और विश्राम के बाद लगभग 2.30 वहां से प्रस्थान किया | सनावद होते हुवे लगभग 5 बजे अमलेश्वर पहुँचे |नर्मदा  परिक्रमा में ओम्कारेश्वर का बहुत महत्व है | अमलेश्वर और ओम्कारेश्वर दोनों ज्योतिर्लिंग है – लेकिन एक माना  गया है | कहते हैं यहाँ सैंकड़ों तीर्थ हैं |

अमलेश्वर ( ममलेश्वर भी कहते हैं) से  ओम्कारेश्वर जानेके लिए बहुत बड़ा पुल बना हुवा है | यहाँ यह समझना आवश्यक है की माँ नर्मदा के एक ओर , दक्षिण तट पर  ममलेश्वर है ओर दूसरी ओर उत्तर तट पर ओम्कारेश्वर | परिक्रमा पूर्ण होने के पूर्व नर्मदाजी को लांघ नहीं सकते. इसलिए पहले ममलेश्वर में ही स्थित ज्योतिर्लिंग की पूजा , नर्मदाजी को  जल अर्पण किया जाता है व लिया जाता है |

ममलेश्वर में बहुत से आश्रम , गेस्ट हॉउस , होटल इत्यादि हैं | हम भक्त निवास पहुँचे , जो शेगांव के संत (ब्रम्हलीन) पूज्य गजानन महाराज के ट्रस्ट द्वरा संचालित है |  कमरों और डोरमेट्री के  लिए यहाँ एडवांस रिजर्वेशन नहीं होता | उपलब्धता के आधार पर साफ सुथरी सभी सुविधाओं ( जैसे गरम पानी, वेस्टर्न स्टाइल कमोड , गीज़र, रूम कूलर , ऐसी , नान ऐसी, ) इत्यादि के साथ , पहले आओ पहले पाओ , व्यवस्था के  साथ न्यूनतम किराये पर यात्रियों , दर्शनार्थीयों और परिक्रमावासियों को आवास व्यवस्था दी जाती है | बताया गया कि लगभग 300 बेड की व्यवस्था  है | वाहनों के लिए पार्किंग स्थल है | पार्किंग स्थल से कमरे तक सामान ले जाने के लिए ट्राली है | अनेकों पेड़ पोधे, हरियाली है

गजानन महाराज जी , दत्त भगवान , अहिल्या माता का मंदिर है | किस समय क्या कार्यक्रम होता है, आरती, जलपान, भोजन,रेट, समय  की सूची, भोजन शाला में  सेल्फ सर्विस, सारी जानकारियां बोर्ड पर लिखी गई हैं |

शुद्ध स्वादिष्ट नाश्ता आलूपोहा / उपमा / इडली / चाय कॉफ़ी 7 रु में उपलब्ध है | असीमित भोजन गरमा गरम रोटी, दाल, चावल , सब्जी , हलुवा 35 रुपये में उपलब्ध है | सेल्फ सर्विस है , किन्तु थाली गिलास साफ करने की उनकी अपनी व्यवस्था है | यदि कोई परिक्रमावासी रात्रि 10 बजे के बाद भी आता है तो उसे भोजन निशुल्क दिया जाता है | कितना भी आग्रह करो , कोई भी कर्मचारी किसी प्रकार की टिप नहीं लेते | सब कुछ बहुत प्रसंशनीय है | यहाँ पर वाहन और पदयात्रा  करने वाले महाराष्ट्र गुजरात दक्षिण भारत  के कई परिक्रमावासियों से , भेंट हुई | परिक्रमा में सबको आनंद की अनुभूति हुई |  

पुरे भारत में इस  ट्रस्ट द्वारा, शेगांव ,ओम्कारेश्वर , पंढरपुर, आलंदी, और त्र्यम्बकेश्वर धार्मिक स्थलों में यात्रियों के लिए भक्त निवास बनाये गए हैं | ट्रस्ट के कार्यकर्ता जिस तरह अपना  कार्य करते हैं, उस तरह यदि देश के नागरिक  अधिकारी , कर्मचारी कार्य करने लगें तो देश का नक्शा ही बदल जायेगा | भविष्य में संयोग हुवा तो शेगांव की व्यवस्था और आनन्द सागर के नाम से भव्य बगीचा है, दर्शन करने की लालसा है | पुनः – सब कुछ बहुत प्रसंशनीय है |

सबकुछ देख कर हमें अपने अमरकंटक आश्रम की याद आ गयी , जहाँ स्वच्छता और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है |

भक्तनिवास में कमरे की व्यवस्था करने के बाद , आधा किमी से भी कम दुरी पर संध्या में ही  ब्रम्हपुरी घाट में माँ नर्मदा जी के दर्शन , नमन किया |

ब्रम्हपुरी घाट
माँ नर्मदा – ब्रम्हपुरी घाट

अमरकंटक में ही हमें बता दिया गया था कि ममलेश्वर में रुद्राभिषेक  पूजा इत्यादि की व्यवस्था के लिए मार्कन्डेय उदासीन आश्रम में स्वामी प्रणवानंद जी से निर्देश लेलेवें | वे प्रवास में थे | अतः आश्रम के कोठारीजी ने इस व्यवस्था हेतु  पंडित सुधीर अत्रे जी को कहा | पंडित जी से भेंट हुई | रुद्राभिषेक हेतु तैयार होकर सुबह 9 बजे ममलेश्वर मंदिर में पहुँचने हेतु बताया |

आज हरदा (9.00 सुबह ) ममलेश्वर (संध्या 5.00 बजे). लगभग 210  किमी  वाया आशापुर, खंडवा, ( पंधाना रोड पर थारवा आश्रम / निहाल वाडी आश्रम ) सनावद , रास्ता: अच्छा दोपहर भोजन : थारवा आश्रम ( पंधाना ) रात्रि विश्राम व भोजन : श्री गजानन महाराज शेगांव  ट्रस्ट संचालित भक्तनिवास

विशेष : पांचवे दिन की जानकारी 12 जुलाई को इसी स्थान पर देखिये