Chronicle 17 , Narmada Parikrama

account – Day 14 , 2.3.2018 शुक्रवार

बरेली से जबलपुर

नर्मदा दर्शन : बरमान घाट, सरस्वती घाट

कल होलिका दहन था | आज रंगोत्सव है , सभी संस्थान बंद थे | हमें कल और आज भी कोई परेशानी नहीं हुई | बरेली में ही ठेले पर स्वादिष्ट पोहे ,समोसे का जलपान किया | यहाँ भी बरेली के एक सज्जन श्री राहुल गुप्ता , हमारे  बहुत निवेदन करने  के बाद भी माने नहीं  – कहा कि परिक्रमा तभी सफल होगी जब परिक्रमा वासी किसी से ले कर क्षुधा  शांत करें | उनका आग्रह और स्नेह के आगे हम को चुप ही रहना पड़ा और जलपान का भुगतान उन्होंने ही किया | हमसे  उपहार स्वरुप कुछ लिया भी नहीं | | गुप्ताजी ने कहा की 6 किमी दूर छिंद धाम है जहाँ दर्शन अवश्य करें | 8.30 बजे  बरेली से प्रस्थान किया |

छिंद धाम के  भव्य मंदिर में हनुमानजी का दर्शन कर जबलपुर के लिए प्रस्थान किया  |

बरमान घाट

बरेली से बरमान घाट लगभग 108 किमी की दुरी पर है , 12.30 पर पहुँचे | नर्मदाजी के दर्शन किये | कहते हैं यह  ब्रम्हाजी की तपो भूमि है , और नदी के मध्य में सूर्य कुंड और ब्रम्ह कुंड है | दुसरे किनारे पर विशाल मंदिर है | घाट काफ़ी बड़ा है | जल भी साफ था | नर्मदाजी में स्नान  कर लिया |

नर्मदाजी बरमा’न

यहाँ होली खेलते हुवे बच्चे मिले | उन्हें उपहार मिला तो बहुत खुश हुवे | उन्हें प्रसन्न देख कर हम भी  बहुत  प्रसन्न हुवे |

बरमान से लगभग 1 घंटे बाद मार्ग पर ही एक बोर्ड पर  आदि शंकराचार्य जी के गुरु पूज्य , गोविन्द पादाचार्य जी की गुफा अन्दर 7 किमी दुरी पर है ऐसा अंकित था | रास्ता कच्चा था , विचार बना कि किसी और समय में दर्शन करेंगे | 

जबलपुर

बरमान से जबलपुर पहुँचे | मार्ग में सरस्वती घाट पर भी नर्मदाजी के दर्शन किये |

सरस्वती घाट

यहाँ से भेडाघाट जाने के लिए  नर्मदा जी का एक पुल  लांघना पडेगा | वहां स्थित हरिहर आश्रम के स्वामीजी ने बताया की “यह पुरानी नर्मदा जी का पुल है , कुछ लोग लांघते हैं , कुछ नहीं | यदि  आपने अभी तक नियम से यात्रा की है तो अब क्यों नियम तोड़ते है “ | हमें उचित लगा , हम भेडाघाट  नहीं गए |

बेटी रानी के यहाँ 4 बजे  जबलपुर पहुँच गए | जबलपुर में पूज्य बाबाजी के कई सेवक शिष्य हैं |  प्रति वर्ष बाबाजी के अनेक कार्यक्रम जबलपुर में सामाजिक व धर्मिक संस्थाओं द्वारा आयोजित किये जाते हैं | बाबाजी के सेवक गुरुभाई श्री शंकरलाल जी खत्री और उनके अभिन्न मित्र  गुरुभाई श्री वासुदेवजी खत्री   (सांवला जी)  जिन्होंने  लम्हेटा घाट पर  विशाल कल्याणीका तपोवन का निर्माण किया है |

कल्याणिका तपोवन लम्हेटाघाट

वासुदेवजी और शंकरलाल जी संध्या को रानी के यहाँ आये | नर्मदाजी की परिक्रमा की बधाइयाँ दीं |  स्नेहसिक्त  होकर मुझे और पुष्पा को  शाल तथा श्री फल भेंट किये |  गुरुभाई डाक्टर गुप्ता जी व उनकी धर्मपत्नी गायत्रीजी भी आये | उन्होंने भी बहुत बधाइयाँ दी | इस स्नेह , भेंट , मिलन के लिए सभी को धन्यवाद|

आज – बरेली (8.30 बजे) से जबलपुर (4 बजे) कुल 230किमी – रास्ता अच्छा वाया छिंद धाम, बरमान घाट, सरस्वती घाट – जलपान : बरेली, रात्रि – जबलपुर

विशेष : शेष यात्रा का विवरण 5.8.19 को देखिये

Chronicle 16 , Narmada Parikrama

account – day 13 1.3.2018 गुरुवार

बडवाहा से बरेली

नर्मदा जी : बडवाहा , नेमावर, बुधनी ,बांदरा भान

हरिओम आश्रम,  जहाँ कल विश्राम किया था , वहां  से ममलेश्वर जाने के लिए नर्मदा जी के पुल पर से जाना पड़ता ,नियम का उल्लंघन न हो , इसलिए आश्रम के निकट बने हुवे खेड़ीघाट पर ही प्रातः नर्मदा में स्नान किया , पूजन किया |

खेड़ीघाट पर स्नान

आश्रम में जलपान के पश्चात बरेली के लिए प्रस्थान किया | बडवाहा से खातेगांव 140 किमी का रास्ता बहुत ख़राब था |

नेमावर

लगभग 2.30 बजे नेमावर पहुँचे | नर्मदा जी के एक किनारे हांडिया (हरदा , परिक्रमा का तीसरा दिन)  और दुसरे किनारे नेमावर – नर्मदा जी का नाभि स्थान है  | जल बिलकुल साफ | नेमावर किनारे से  नाभि  , हंडिया की अपेक्षा नजदीक है, दूर से ही दर्शन किये |

ज संन्ध्या होली दहन व कल रंग उत्सव है | नेमावर में स्थानीय लोगों ने नर्मदा जी के किनारे होली का रंग जमाना शुरू कर दिया था , किन्तु हमें कोई भी परेशानी नहीं हुई |  

नेमावर
बताते हैं यहाँ पर सिद्धनाथ मंदिर है जिसकी स्थापना सनकादि ऋषियों ने की थी | इसे  जमदग्नि ऋषि की तपो भूमि  भी मानते हैं | मंदिर की नक्काशी कारीगिरी देखने लायक है ,जिसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया है |

रेहती रामगढ़ा

नेमावर से लगभग 55 किमी बरेली मार्ग पर  रेहती रामगढ़ा में भव्य सुंदर  मंदिर दिखाई दिया | विशाल परिसर में स्व्च्छता थी |विभिन्न मंदिरों के  दर्शन किये |

बिजासन माता मंदिर  

फिर नेमावर से सलकनपुर , वहां से बरेली मार्ग पर पर्वत पर बिजासन माता मंदिर है | कार से भी मार्ग  है और रोप वे भी है | बहुत ही विशाल सुंदर परिसर, फेंसिंग से घिरा हुवा ,अच्छा रख रखाव, यात्रियों के लिए बगीचे के साथ बैठने के उचित व्यवस्था, प्राकृतिक सौंदर्य – ये सब आज भी स्मृती पटल पर है | बिजासन माता व् अन्य दर्शन कर 6 बजे वहां से प्रस्थान किया |

बिजासन

बुधनी – बांदरा भान – बरेली 

मार्ग में बुधनी में नर्मदाजी दर्शन किया |  फिर बांदरा भान , जहाँ तवा नदी और नर्मदाजी का संगम , स्पष्ट दिखता है, जल भी स्वच्छ है , दर्शन किये | बान्दराभन तपो भूमि है |

बान्दराभान दर्शन करने के बाद लगभग 7 बजे बरेली पहुँचे | बरेली में गैलेक्सी पैलेस नया होटल बना है जहाँ विश्राम किया |

आज – बडवाहा (10 बजे ) से बरेली ( 8 बजे) लगभग 330 किमी वाया नेमावर ,रुद्रधाम रेहती ,सलकनपुर , बुधनी , बान्दराभान से बरेली, रास्ता – बडवाहा से खातेगांव 140 किमी ठीक नही जलपान –आश्रम,  भोजन – ढाबा , रात्रि विश्राम व भोजन – बरेली डीज़ल – बरेली

विशेष : चौदहवें दिन का विवरण 4.8.19 को देखिये