Chronicle 22 Narmada Parikrama

ACCOUNT – DAY 19 , 10. 3. 2018

ओम्कारेश्वर –पञ्च कोषीय यात्रा –

रेवा  सागरसंगम  जल अर्पण अभिषेक –नर्मदा परिक्रमा परिपूर्ण

10 मार्च को प्रातः 6 बजे  मंदिर में दर्शन कर पुष्प , बेल पत्र , जल अर्पण किया |

नियम के अनुसार ओम्कारेश्वर की परिक्रमा भी करनी चाहिए | पुष्पा  ने पहले तो यह कह दिया कि 7- 8 किमी वह नहीं चल पायेगी , किन्तु मंदिर से बाहर आ कर परिक्रमा मार्ग पर आते ही स्वेच्छा से साथ चलने लगी और ओम्कारेश्वर की परिक्रमा भी पूर्ण की |

ओम्कारेश्वर की परिक्रमा ,राजेंद्र , पुष्पा और मैंने प्रारम्भ की |चढ़ाई उतराइ के साथ पूरी परिक्रमा में मार्ग के किनारे पर लगे गुलाबी रंग के शिलालेखों पर श्रीमत्भागवत गीता के 18 अध्यायों के पूरे 700 संस्कृत के श्लोक हिंदी अनुवाद के साथ लिखे हुवे हैं |

श्रीमत्भागवत गीता का श्लोक

इस पञ्च कोशीय परिक्रमा में अनेकों मंदिर, तीर्थ हैं | कावेरी और नर्मदा जी का संगम है |

संगम में जल स्तर बहुत ही कम था | पथरीला मार्ग और अंदर भी पत्थर | सावधानीपूर्वक संगम में स्नान किया |

कावेरी और नर्मदा जी का संगम

ऋण मुक्तेश्वर, गौरी सोमनाथ तीन मंजिल मंदिर ,

पाताली  हनुमानजी, लेटे हुवे हनुमानजी, ग्यारह्मुखी हनुमानजी,

राज राजेश्वरी सेवा संस्थान ,

सिद्धनाथ बारह द्वारी

अनेकों दर्शन कर , रुद्राभिषेक के लिए तैयार होकर लगभग 10 बजे  ओम्कारेश्वर मंदिर पहुँचे |

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंडित श्री अनिल दुबे महाराज जी से भेंट हुई | पंडितजी ने मंदिर में ही रेवा सागर संगम से लाये हुवे जल से ओम्कारेश्वर लिंग की अभिषेक पूजा करवाई |

ओम्कारेश्वर में रेवा सागर संगम जल अर्पण , अभिषेक , पूजा

ओम्कारेश्वर लिंग अनगढ़ है, मंदिर के शिखर के ठीक नीचे न होकर थोडा हटकर है | मंदिर में सीढ़ियां चढ़कर जाने से दूसरी  मंजिल में महाकालेश्वर लिंग मूर्ति  है और तीसरी मंजिल पर बैद्यनाथेश्वर है , ये दोनो शिखर के नीचे है |

पंडितजी ने वहां भी अभिषेक पूजा करवाई | इसके बाद 9 कन्याओं का पूजन , कढाई प्रसाद से  (हलुवा पूड़ी ) सबको भोजन और दक्षिणा दे कर आशीर्वाद प्राप्त किया |

अब नर्मदा परिक्रमा का क्रम पूर्ण हुवा |

माँ के पास इतने दिन रहे , एकदम छोड़ने का मन नहीं हो रहा था | इसलिए संध्या फिर ब्रम्हांड घाट पर दर्शन स्नान और नमन किया | क्षमा प्रार्थना की  – जाने अनजाने कोई भूल हो गई हो , जो कर्म कर सकते थे नहीं किया और किसी मर्यादा का उल्लंघन हो गया हो तो माँ क्षमा कर देना |

11 मार्च 2018 रविवार : उज्जैन – महाकाल

पुज्य बाबाजी की सलाह थी कि परिक्रमा के बाद उज्जैन महाकाल के दर्शन अवश्य कर लेना |

दोपहर तक उज्जैन पहुँच गए | पूज्य राजा बाबा ने बाबाजी के  शिष्य श्री शर्माजी को महाकाल की  अभिषेक व्यवस्था के लिए पहले ही सूचित कर दिया था | शर्माजी ने पूरी तैयारी कर रखी थी | महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में आनंद के साथ अभिषेक किया | उज्जैन के अन्य मंदिरों के भी दर्शन कर कृतार्थ हुए |

यात्रा के अविस्मरणीय अनुभव और स्मृतियों के साथ 12 मार्च 2018 को राजनांदगांव लौट गए |

दो दिन बाद ही दुर्ग से श्री अनिल जी कश्यप और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुपमा जी आये | अमरकंटक आश्रम से जुड़ने की एक उपलब्धि यह भी है कि अपने परिवार के अतिरिक्त गुरु भाइयों के बहुत बड़े परिवार से बिना स्वार्थ का सम्बन्ध बन जाता है | अनिल जी और उनका पूरा परिवार हमें बहुत स्नेह और सम्मान देता है | वे प्रतिवर्ष दुर्ग में पूज्य बाबाजी का तीन दिन का कार्यक्रम भी करवाते हैं | उन्होंने आदर और स्नेह के साथ मुझे शगुन के रूप में श्रीफल, रेशम की धोती और पुष्पा को साड़ी भेंट की | यात्रा का संक्षिप्त विवरण सुनकर , उन्होंने भी मानस बनाया कि जब भी संभव होगा वे भी परिक्रमा करेंगे |

एक और सुखद संयोग – परिक्रमा का पूरा विवरण लिखने के बाद , कश्यप जी के सुपुत्र आदित्य बाबू को जैसे ही जानकारी मिली तो उन्होंने इसके लिए इतना सुंदर ब्लॉग तैयार कर दिया | दुर्ग से आकर सब कुछ मुझे समझाया | उनके प्रयास के बिना शायद यह वृतांत फाइलों में ही पड़ा रहता , आप सब तक पहुँचाना संभव नहीं हो पाता | उन्हें धन्यवाद | माँ नर्मदा आदित्य बाबू पर भी कृपा करे |

आपकी रूचि के लिए धन्यवाद | माँ नर्मदा की कृपा सब पर सदैव बनी रहे |

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामय ,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चित् दुखभाग्भवेत |

शान्तिः शान्तिः शान्तिः

* * * * * * * * *

पुनश्च :

परिक्रमा प्रारंभ की गई थी मात्र उत्सुकता, उत्साह , किंचित साहस की मानसिकता के साथ | अब तक जीवन में जो सुना था , पढ़ा था , कुछ  देखा था , किन्तु वह पढने सुनने और देखने के धरातल तक ही रहा | इन अठारह बीस दिनों में वे सब वैचारिक मथनी से अनुभव में आत्मसात हुए |

अपना बहुत कुछ छोड़ कर चलने वाले पदयात्रियों का न्यूनतम आवश्यकताओं  में भी जीवन निर्वाह और प्रवाह रुकता नहीं – अधिक निर्मलता  और स्वच्छता के साथ , गतिमान रहता है – जैसे नर्मदाजी का प्रवाह |

बच्चों के समूह में जिसको कुछ भी नहीं मिला , उसके चेहरे पर भी उतनी ही प्रसन्नता जितनी प्रसन्नता उस बच्चे के चेहरे पर है जिसको कुछ मिला है | कोई ईर्ष्या , द्वेष लड़ाई नहीं |

जिन्हें साधारण श्रेणी का समझा जाता है,उनके द्वारा यात्रा के दौरान जलपान , भोजन करने का आग्रह  |

समर्पण संगम – आनंद की थोड़ी सी झलक !

ये सब अप्रत्याशित अनुभव हैं ,जिन्हें शब्दों में अभिव्यक्त करने की योग्यता मुझ में नहीं है | ऐसा लगने लगा है कि बहुत देर कर दी , बहुत कुछ छूटने की कसक है | कुछ बदलाव भी हो रहा है | 

इसमें ज़रा भी संदेह नहीं है कि सद्गुरु पूज्य बाबाजी और  माँ  नर्मदा की कृपा और आशीर्वाद से ही यह परिक्रमा संभव हुई और उसका सकारात्मक लाभ प्राप्त हुवा |

पूज्य बाबाजी .नर्मदा माई, माता पिता को हमारा बार बार प्रणाम |

नर्मदे हर | पूज्य सदगुरुदेव बाबाजी की जय |

पूज्य बाबाजी का आशीर्वाद ,स्नेह, कृपा अक्षुण्ण रहे |

Chronicle -21 Narmada Parikrama

ACCOUNT – DAY 18, 9.3.18 शुक्रवार

ओम्कारेश्वर –

 9 मार्च को इंदौर पहुँचे | इंदौर से 80 किलोमीटर की दुरी पर तीर्थ नगरी ओम्कारेश्वर संध्या 5 बजे  पहुँच गए | मेरे ससुराल पक्ष से पुष्पा के भाई राजेंद्र और मामा मामी भी इंदौर से साथ में थे | श्री गजानन महाराज ट्रस्ट शेगांव संचालित  भक्त निवास में विश्राम हेतु कमरे बुक किये |

संध्या में ब्रम्हांड घाट पर बहुत समय तक शांत वातावरण का आनंद लेते रहे  | स्थानीय लोगों ने वहां स्पीकर माइक लगा कर नित्य की भांति नर्मदा अष्टकं का पाठ संध्या कालीन पूजा आरती की |

ब्रम्हांड घाट
शयन आरती के समय -मंदिर
शयन कक्ष में चौपड़ पासा ,झूला

मंदिर में ही महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंदपूरी महाराजजी  भी थे | विवेकानंदपूरी महाराज जी , पूज्य बाबाजी का बहुत सन्मान करते हैं , डोल आश्रम के वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में भी आप थे | ओम्कारेश्वर रोड खंडवा में आपका बड़ा आश्रम भी है | हमने नर्मदा परिक्रमा पूरी की , जानकर उन्हें प्रसन्नता हुई, आशीर्वाद दिया | मंदिर के प्रमुख पंडित अनिल महाराज जी को कहा कि  कल ओम्कारेश्वर में विधि पूर्वक रुद्राभिषेक करवा देवें | बाबाजी की कृपा से सब कार्य उतरोत्तर व्यवस्थित ढंग से होते गए |

मंदिर प्रांगण में स्वामी विवेकानंद पुरी जी के साथ

रात्रि विश्राम भक्त निवास में किया |  

विशेष : समापन के लिए भी देखिये | आपकी रूचि के लिये धन्यवाद |    

Chronicle – 20NarmadaParikrama

account – day 17 , 5.3.2018 सोमवार

अमरकंटक – माई की बगिया , परिक्रमा पूर्ण

पूर्व में सुचना दे दी गई थी, उसके  अनुसार आज माई की बगिया में कढाई प्रसाद तैयार हुवा |  पंडितों ने नर्मदा माई ,कन्याओं का पूजन करवाया | कन्याओं ने  आशीर्वाद दिया |  मंदिर में  हम सब ने दर्शन किया | आज  उत्तर तट की परिक्रमा भी पूर्ण हुई |

माई की बगिया
कन्या भोजन ,पूजन

वैसे तो यात्रा की दृष्टि से परिक्रमा पूर्ण हो गई | नियम  के अनुसार यात्रा के प्रारंभ में नर्मदा जी का जो जल यहाँ से लिया था और उस जल में से कुछ गोमुख ममलेश्वर (ओम्कारेश्वर ) में अर्पण किया था, फिर गोमुख का जल रेवा सागर संगम में अर्पण किया और रेवा सागर का कुछ जल  यहाँ और यहाँ से पुनः जल लेकर ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करने से ही परिक्रमा की पूर्णता होती है | ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करने के लिए हमने भी पुनः नर्मदा  जल ले लिया |

“परिक्रमा यात्रा “ पूर्ण होने पर अब नर्मदाजी के पुल पर से जा सकते हैं , अब  नर्मदाजी को लांघने से कोई नियम भंग नहीं होता – कोई दोष नहीं लगता | सत्रह दिनों की यह परिक्रमा पूज्य बाबाजी की कृपा व आशीर्वाद से  बिना किसी विघ्न असुविधा, परेशानी के पूर्ण हुई |

आज राजनांद्गाँव के लिए प्रस्थान किया | ज्ञात हुवा कि डोल आश्रम में स्थापना  के लिए दक्षिण भारत से विशेष वाहन में श्री यंत्र ले कर पूज्य राजा बाबा आज ही रायपुर पहुँचे हैं  | यह हमारा सौभाग्य ही था कि नर्मदा परिक्रमा के अंतिम चरण में रायपुर में श्री यंत्र के दर्शन भी प्राप्त हुए | राजा बाबा का आशीर्वाद भी मिला |

विशेष ; अठारहवें दिन का विवरण भी को देखिये

Chronicle-19 Narmada Prikrama

account – day 16 रविवार 

जबलपुर से अमरकंटक

नर्मदाजी : जिलहेरी घाट , जोगी टिकरिया (डिंडोरी,)

आज सुबह जलेरी घाट का दर्शन किया , यह ग्वारी घाट की अपेक्षा अधिक बड़ा , साफ सुथरा है | आज फिर  माँ की गोद में स्नान  का आनंद लिया | पूजा की |जिलहरी घाट पर छोटे छोटे बहुत से मंदिर हैं जहाँ शिवलिंग की पूजा होती है |

लगभग 9.30 बजे जबलपुर से प्रस्थान किया | करीब  3 घंटे बाद मार्ग में ही बडखेरा आश्रम शहपुरा में एक मंदिर देख कर रुके | अर्धनारीश्वर शंकरजी, हनुमानजी, दुर्गाजी के  दर्शन के साथ ही , एक शिवलिंग पर अनेको शिवलिंग के दर्शन किये |

  • बडखेरा आश्रम शहपूरा के मंदिर

लगभग 3 बजे जोगी टिकरिया (डिंडोरी के दुसरे किनारे ) में पुनः नर्मदाजी के दर्शन किये | जलराशि तो इतनी कम थी कि लोटा भरकर ही स्नान किया जा सकता था , किन्तु शांत प्रवाह , शीतलता और चट्टानों पर बहता आईने की तरह साफ जल देख स्नान की इच्छा रोक नहीं सका, गोद में बैठकर नहीं लेट कर ही स्नान का आनंद का आनंद लिया |

घाट के पास  ,कुछ कार ,ट्रक बस खड़ीं थीं | बताया गया की नेता जी की पैदल परिक्रमा से संबधित है , अमरकंटक जाने वाली है, समापन की ओर है |

वहां से  प्रस्थान किया | बिना रेलिंग के पुल को परिक्रमावासी लांघें नहीं, इसलिए “ माँ नर्मदा परिक्रमा पथ – उत्तर तट “ का मार्ग संकेतक भी लगा था |

राजेन्द्रग्राम ,पोडकी होते हुवे अपने  श्री कल्याण सेवा आश्रम पहंच गए | आश्रम में पूज्य श्री हिमान्द्री महाराज जी थे उन से आशीर्वाद प्राप्त किया | कल सुबह माई  की बगिया में माँ का व कन्याओं का पूजन , कडाही प्रसाद आदि की व्यवस्था की चर्चा की | पूज्य बाबाजी को तो सब जानकारी रहती ही है , फिर भी उनको भी सुचना दे दी कि आपकी कृपा से हम आश्रम पहुँच गए हैं | परिक्रमा पूर्णता की ओर है |

आज जबलपुर (9.30 बजे) से अमरकंटक (6 बजे) लगभग 300 किमी वाया कुंदम ,शहपुरा , जोगी टिकरिया राजेंद्र ग्राम , पोडकी अमरकंटक रास्ता – अच्छा

विशेष : सत्रहवें दिन का विवरण भी को देखिये

Chronicle -18 Narmada Parikrama

account – day 15, 3.3.2018 शनिवार

जबलपुर

नर्मदाजी दर्शन : ग्वारीघाट

संस्कारधानी जबलपुर के निवासियों पर नर्मदाजी ने असीम कृपा की है | जबलपुर में नर्मदाजी के अनेकों घाट हैं | मुख्य रूप से ग्वारी घाट, तिलवारा घाट, र्त्रिशूल घाट, लम्हेटा घाट , भेड़ाघाट , सरस्वती  घाट , जलेरी घाट हैं |

कल सरस्वती  घाट  के दर्शन किये थे | आज सुबह ग्वारीघाट का दर्शन किया | साफ सुथरा बहुत बड़ा घाट है, जल साफ है | अभी ज्यादा भीड़ नहीं थी | दर्शनार्थियों  को दुसरे किनारे पर ले जाने और नौका विहार के लिए नौकाएं भी उपलब्ध थी स्नान पूजन किया |

ग्वारी घाट

पक्षीयों के झुण्ड भी नर्मदाजी का आनंद ले रहे थे | | दुसरे किनारे पर विशाल गुरुद्वारा है | यहाँ सिद्ध कुंड भी है  |  वातावरण बिलकुल शांत था |

फिर पूज्य स्वामी गिरिशानन्दजी जो पूज्य बाबाजी के अत्यंत स्नेही है, उनके दर्शन हेतु  साकेत धाम पहुँचे | बडा  परिसर , शांत पवित्र  वातावरण  में रामेश्वरम महादेव के दर्शन किये |

साकेत धाम

तत्पश्चात पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्यामदास जी महाराज के आश्रम गीता धाम जा कर उनके दर्शन भी किये  |

डीज़ल – जबलपुर   

विशेष : सोलहवें दिन का विवरण भी को देखिये