Chronicle -13 Narmada Parikrama

account- Day 10, 26.2.18 सोमवार

नारेश्वर से गरुडेश्वर

नर्मदाजी : नारेश्वर , मालसर, , बदरिका आश्रम , चाणोद , करनाली , तिलकवाडा   

          नारेश्वर – स्वामी श्री रंग अवधूत सेवा संस्थान

श्री रंग आशीष आवास से 1 किमी पर ही विशाल नर्मदाजी हैं | रास्ते में और नर्मदाजी के किनारे पर बोर्ड  लगे थे कि नदी में मगर मच्छ हैं, सावधान रहें | नर्मदाजी का वाहन मगर ही है | बहुत सी सीढियाँ उतरने के बाद , कीचड़ नहीं था ,घुटने तक जल और वह भी क्रिस्टल क्लियर | लम्बी जीवन यात्रा की सीढ़ियों पर उतरते चढ़ते व्यवहारों और  अनुभवों के बाद व्यक्ति का ह्रदय भी तो शांत और निर्मल हो जाना चाहिये |  

माँ की गोद में बैठकर स्नान करने का बहुत आनंद आया | खुले मैदान में खाने पीने के बहुत से स्टाल लगे थे | इस समय सभी खाली थे , कपड़े बदलने की सुविधा भी थी | देखा कि पास के गाँव से लोग यहाँ लोग फेरी (बोट) से आ रहे हैं | स्नान के बाद पूजा , आरती और प्रसाद वितरण किया |

छोटे से गाँव में जहाँ कोई बड़ा व्यवसाय उद्योग नहीं है,  आश्रम और नर्मदाजी के बीच रास्ते में बहु मंजिली इमारतों में अनेकों खाली फ्लैट दिखे | बताया गया कि सभी फ्लैट गुजरात ,महाराष्ट्र अन्य स्थानों के  लोगों ने खरीद लिए हैं  और जब आश्रम में कोई उत्सव या कार्यक्रम होता है तो हजारों श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था यहाँ की जाती हैं | संतो पर नर्मदा जी की कृपा और जन समुदाय की ऐसी श्रद्धा भारत के अतिरिक्त और कहाँ मिलेगी |

स्नान के बाद श्री रंग अवधूत सेवा संस्थान का दर्शन किया | स्वामी रंग अवधूत जी  का जन्म 21 नवम्बर 1898 बड़ोदा में हुवा | स्वामी वासुदेवानान्दजी सरस्वती उनके आध्यात्मिक गुरु थे | स्वामी रंग अवधूत जी ने नर्मदा परिक्रमा की और नारेश्वर में ही नर्मदाजी के तट पर सेवा प्रकल्प ले कर रम गए | 19 नवम्बर 1968 को हरिद्वार में शरीर छोड़ा | उनके अनुयायी उन्हें भगवान् दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं | 21 नवम्बर 68 को उनके पार्थिव  शरीर को नारेश्वर लाया गया | अंतिम  संस्कार किया गया |

भगवान दत्ता त्रय अवतार श्री रंग अवधूत स्वामी

श्री रंग अवधूत संस्थान  आश्रम बहुत बडे परिसर में फैला हुवा है | स्वच्छ शांत अनुशाषित वातावरण  है – ध्यान मंदिर भी है | वहां के शिलालेखों से ऐसी जानकारी मिलती है कि  रंग अवधूत जी अपनी माता के आदेश को सुप्रीमकोर्ट के आदेश की तरह मानते थे | मंदिर या किसी भी स्थल पर पैसे देने या रखने की स्पष्ट मनाई लिख कर की गई है | जो भी देना है , कार्यालय में दिया जाता है और उसकी रसीद दी जाती है |आश्रम में सभी जगह केवल गुजराती भाषा में ही जानकारियां लिखी गई हैं | मैंने व्यवस्थापक से निवेदन किया कि अन्य भाषा के दर्शनार्थी भी आते हैं , अतः हिंदी में भी लिखा जावे |

सुबह 11.00 बजे और संन्ध्या 7.00 बजे आश्रम में निशुल्क भोजन व्यवस्था है | हमें भी भोजन प्रसाद  हेतु आमंत्रित किया गया | नर्मदा जी को भोग लगा हलुवा ,दाल चावल सब्जी इतना स्वादिष्ट और गरम भोजन आज भी याद है | माँ की कृपा हुई तो दुबारा भी यह प्रसाद प्राप्त करेंगे | उसी दिन किसी स्कूल से सैंकड़ों विकलांग, सूरदास विद्यार्थी आये थे | सभी दर्शनार्थियों को निशुल्क  भोजन दिया जाता है | भोजन प्रसाद प्राप्ति के बाद प्रस्थान किया |

मालसर

बद्रीका आश्रम से गरुडेश्वर के मार्ग पर , नर्मदाजी के उत्तर तट पर  मालसर है वहां  भी कुछ समय के लिए रुके | अंगारेश्वर ,शिव मंदिर, पांडू तीर्थ तथा अयोनिज तीर्थ  है | अयोनिज ऋषि की तपोभूमि है | राजा पांडू और मंगल ग्रह ने तप किया था | यहाँ  डोंगरे महाराज का  बहुत बड़ा  आश्रम है ,जहां , पूर्व सूचना के आधार पर रुकने  भोजन की व्यवस्था हो जाती है | सत्संग , भजन कार्यक्रम चलते रहते हैं |

मालसर नर्मदाजी

अनुसूया माता मंदिर

नारेश्वर से लगभग 57 किमी अनुसूया में अनुसूया माता का मंदिर है , जहाँ अनुसूया माता ने तपस्या की थी | तपस्या के  फलस्वरूप माता अनुसूया को ब्रम्हा के तेज से चन्द्र,  , विष्णु के तेज से दत्तात्रेय  व् महेश के तेज से दुर्वासा पुत्र रूप में प्राप्त हुवे | मंदिर में ही छोटा सा किन्तु बहुत गहरा कुंवा है , कहते है की माता की तपस्या के कारण गंगा जी भी यहाँ आई |

अनुसूया माता मंदिर

बदरिका आश्रम

अनुसुया माता मंदिर से बदरिका आश्रम गए | बहत ही सुंदर मंदिर है, परिसर बहुत बड़ा है, शंकर जी  और हनुमान जी की विशालकाय मूर्तियां  है, सामने ही  नर्मदा जी हैं | ऐसे सुंदर भव्य परिसर, दृश्य  ,शांत वातावरण , मन करता है  यहीं रुक जाएँ | माँ से हर जगह प्रार्थना कर रहे थे , माँ दुबारा फिर अवसर देना |

चांदोद

बदरिका आश्रम से  चांदोद (चाणोद)  गए , वहां भी नर्मदा जी है | इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है | प्रातः नारेश्वर में नर्मदा स्नान किया था , किन्तु यहाँ माँ की विशालता देख कर पुनः मन हुवा और स्नान किया , नमन किया | चांदोद में   शेष नारायण, बालाजी , आदि कई मंदिर हैं ऋणमुक्तेश्वर ,कपिलेश्वर महादेव  के दर्शन किया  | यहाँ सात तीर्थ – चंड आदित्य ,चंडिका देवी, चक्रतीर्थ (कहते हैं तालमेघ दैत्य को मारकर भगवान विष्णु ने यहाँ नर्मदाजी में अपना चक्र धोया था ), कपिलेश्वर, (कपिल भगवान ने तप किया था ) ऋणमुक्तेश्वर ,पिंगलेश्वर (अग्नि देवता ने तप किया था ) और  नंदाल्हद हैं |

कपिलेश्वर महादेव मंदिर चांदोद

करनाली

चांदोद से करनाली जहाँ ओर नदी का नर्मदा जी में संगम होता है – लोग पश्चिम प्रयाग भी कहते हैं | सोमेश्वर तीर्थ है | कुबेर भंडारी , नर्मदा माँ  व अग्नि देब भगवान  सूर्य देव का मंदिर है | बड़े बड़े परिसर साफ सुथरे  , आवास सुविधा  और भोजन की व्यवस्था , देखकर मन प्रसन्न हो जाता है |

त्रिवेणी संगम करनाली

तिलकवाडा

फिर तिलकवाडा , मणि नदी के किनारे है , यहाँ गौतम ऋषि ने तप किया था, मणितीर्थ कहा जाता है | तिलकवाडा में वासुदेवानंद सरस्वती मंदिर में दर्शन किये , जो रंग अवधूत स्वामीजी  के गुरु थे | यहाँ की  भव्यता , सौन्दर्य आज भी मन मस्तिष्क पर अंकित है | गरुडेश्वर के लिए प्रस्थान किया |

तिलकवाडा

नारेश्वर से गरुडेश्वर लगभग 150 किमी की यात्रा , मार्ग में सभी दर्शन करते हुवे लगभग 8 घंटों में पूरी की | गरुडेश्वर में श्री दत्तात्रेय मंदिर और स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वतीजी  की समाधी भी है | स्वामी कार्तिक की तपो भूमि – कुमारेश्वर तीर्थ है | श्री दत्त संस्थान में नई और पुरानी विंग  में न्यूनतम पेमेंट पर सुंदर सुविधाजनक आवास एसी नान एसी कमरे , बड़े बड़े हाल 4 से 6 पलंग लगे हुवे उपलब्ध हैं | रात्रि में मंदिर में ही स्वादिष्ट गर्म भोजन प्राप्त किया  | पूरा संस्थान नर्मदा जी के तट पर ही है |

आज नारेश्वर  (11.30 ) गरुडेश्वर (7.30)  लगभग 150 किमी, वाया मालसर, अनुसूया , बदरिका आश्रम , चाणोद , करनाली , , तिलकवाडा     रास्ता: अच्छा है भोजन : श्री रंग अवधूत आश्रम रात्रि विश्राम व् भोजन : श्री दत्त सेवा संस्थान , गरुडेश्वर

विशेष : ग्यारवें दिन का विवरण 3.8.19 को देखिये

       

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