account – day 16 रविवार
जबलपुर से अमरकंटक
नर्मदाजी : जिलहेरी घाट , जोगी टिकरिया (डिंडोरी,)
आज सुबह जलेरी घाट का दर्शन किया , यह ग्वारी घाट की अपेक्षा अधिक बड़ा , साफ सुथरा है | आज फिर माँ की गोद में स्नान का आनंद लिया | पूजा की |जिलहरी घाट पर छोटे छोटे बहुत से मंदिर हैं जहाँ शिवलिंग की पूजा होती है |


लगभग 9.30 बजे जबलपुर से प्रस्थान किया | करीब 3 घंटे बाद मार्ग में ही बडखेरा आश्रम शहपुरा में एक मंदिर देख कर रुके | अर्धनारीश्वर शंकरजी, हनुमानजी, दुर्गाजी के दर्शन के साथ ही , एक शिवलिंग पर अनेको शिवलिंग के दर्शन किये |
- बडखेरा आश्रम शहपूरा के मंदिर
लगभग 3 बजे जोगी टिकरिया (डिंडोरी के दुसरे किनारे ) में पुनः नर्मदाजी के दर्शन किये | जलराशि तो इतनी कम थी कि लोटा भरकर ही स्नान किया जा सकता था , किन्तु शांत प्रवाह , शीतलता और चट्टानों पर बहता आईने की तरह साफ जल देख स्नान की इच्छा रोक नहीं सका, गोद में बैठकर नहीं लेट कर ही स्नान का आनंद का आनंद लिया |

जलेरी घाट 
नाम मात्र का जल किन्तु बिलकुल साफ़
घाट के पास ,कुछ कार ,ट्रक बस खड़ीं थीं | बताया गया की नेता जी की पैदल परिक्रमा से संबधित है , अमरकंटक जाने वाली है, समापन की ओर है |
वहां से प्रस्थान किया | बिना रेलिंग के पुल को परिक्रमावासी लांघें नहीं, इसलिए “ माँ नर्मदा परिक्रमा पथ – उत्तर तट “ का मार्ग संकेतक भी लगा था |
राजेन्द्रग्राम ,पोडकी होते हुवे अपने श्री कल्याण सेवा आश्रम पहंच गए | आश्रम में पूज्य श्री हिमान्द्री महाराज जी थे उन से आशीर्वाद प्राप्त किया | कल सुबह माई की बगिया में माँ का व कन्याओं का पूजन , कडाही प्रसाद आदि की व्यवस्था की चर्चा की | पूज्य बाबाजी को तो सब जानकारी रहती ही है , फिर भी उनको भी सुचना दे दी कि आपकी कृपा से हम आश्रम पहुँच गए हैं | परिक्रमा पूर्णता की ओर है |
आज जबलपुर (9.30 बजे) से अमरकंटक (6 बजे) लगभग 300 किमी वाया कुंदम ,शहपुरा , जोगी टिकरिया राजेंद्र ग्राम , पोडकी अमरकंटक रास्ता – अच्छा
विशेष : सत्रहवें दिन का विवरण भी को देखिये


