Chronicle -15 Narmada Parikrama

account – day 12 , 28.2.18 बुधवार

मांडव से बडवाहा

नर्मदाजी  : महेश्वर, मंडलेश्वर, बडवाहा

मांडव मे रेवा कुंड के दर्शन किये | लोगों का विश्वास है कि रेवा कुंड में नर्मदाजी का जल आता है | इसलिए परिक्रमावासी कुंड में स्नान / दर्शन करने अवश्य आते हैं | बताते हैं कि रानी रूपमती नित्य नर्मदाजी के दर्शन करने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करती थी | सुविधा की दृष्टि से रेवा कुंड का निर्माण किया गया | वर्षा ऋतू में रेवा कुंड पूरा भर जाता है | महाराष्ट्र से बस से आये हुवे परिक्रमा वासी कुंड में स्नान पूजा कर रहे थे, और पास ही  जलपान भोजन बन रहा था | रेवा कुंड के बाद नीलकंठ पेलेस के  दर्शन , जलपान कर , हमने महेश्वर के लिए प्रस्थान किया |

रेवा कुंड

दुधी धामनोद

महेश्वर जाने  के मार्ग में दुधी धामनोद ग्राम में थोड़ी ऊंचाई पर एक भव्य मंदिर दिखाई दिया | वहां पहुँचने पर अत्यंत प्रसन्नता हुई | विशाल परिसर में श्री राज राजेश्वरी उपासना केंद्र  है | ललिता महात्रिपुर सुंदरी , गणेशजी, राम दरबार कृष्णजी व अन्य मंदिरों के दर्शन , गौशाला , नवग्रह हवन कुंड, और विद्यार्थियों द्वारा संस्कृत पाठ  पुरे वातावरण में  पवित्रता  और भव्यता  की वृद्धि कर रहे थे | कुछ समय वहां रुके ,  बहुत अच्छा लगा | आज भी स्मृति बनी हुई है | महेश्वर के लिए प्रस्थान किया |

दुधी धामनोद राज राजेश्वरी धाम

महेश्वर

नर्मदाजी महेश्वर

महेश्वर में नर्मदाजी की विशालता , स्वच्छ , विपुल , जल राशी , बड़े बड़े  सुन्दर साफ सुथरे घाट हैं | और गहराई ज्यादा होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से स्नान के लिए चैन लगी है ताकि माँ की गोद में सुरक्षित स्नानकर सकें | , स्नान के बाद पूजन , प्रसाद वितरण | फिर भगवान बांके बिहारी के मंदिर में शुद्ध पवित्र गरमा गरम भोजन – ठाट ही ठाट – क्या कहना |

महेश्वर में ही राज राजेश्वरी मंदिर  , महाप्रभु जी की बैठक , शिव लिंग जिनकी पूजा स्वयं रानी करती थीं  , रानी अहिल्या बाई होल्कर के महल किला , व्यवस्था  सब कुछ  अद्वितीय है | होल्कर घराने का इतिहास – सब के दर्शन किये | महेश्वर का पुराना नाम माहिष्मती पुरी है | इसे गुप्त काशी भी कहा जाता है और काशी के सामान ही इसका महत्व है |

मंडलेश्वर  

महेश्वर से बड़वाहा ,के मार्ग में एक स्थान मंडलेश्वर आता है , यह जिला भी है | यहाँ भी नर्मदा जी के  दर्शन , राम मंदिर ,काल भैरव मंदिर , छप्पन देव मंदिर के दर्शन के बाद गुप्तेश्वर मंदिर के दर्शन भी किये | ऐसा कहा जाता है कि जगत्गुरू श्री शंकराचार्य जी एवं परम  विद्वान मंडन मिश्र जीके बीच यहाँ शास्त्रार्थ हुवा था जिसमे मंडन मिश्र जी की पराजय हुई | तब उनकी विदुषी पत्नी भारती देवी  ने शंकराचार्य जी से शास्त्रार्थ किया | भारती  देवी ने जगतगुरु से काम संबंधित प्रश्न पूछे , तब जगतगुरु ने छह माह का समय माँगा था ,और इस काल के लिए उसी स्थान पर समाधी ली थी | परिक्रमा  के दौरान अति सहजता से ऐसे ऐतिहासिक , पौराणिक स्थानों का दर्शन लाभ भी हुवा |

बडवाहा

संध्या लगभग 5.30 बजे बडवाहा , हरी ॐ आश्रम पहुँचे | पूज्य संत भागवतानन्द जी महाराज , पूज्य बाबाजी के साथ के ही हैं और बाबाजी से बहुत स्नेह रखते हैं| खूब भजन करते हैं | दर्शन कर प्रणाम किया | पूज्य बाबाजी की कृपा से स्वामी जी ने आश्रम में ही हमारी व्यवस्था कर दी | विशाल आश्रम में मंदिर  , संतों व परिक्रमा वासियों के  आवास भोजन की पूर्ण व्यवस्था है | संध्या में खेडीघाट पर नर्मदा जी के दर्शन किये | रात्रि में आश्रम  में संतों ने भजन किया हमें भी उपस्थित रहने का सौभाग्य प्राप्त हुवा |

आज मांडव (10 बजे ) बडवाहा ( 5.30 बजे ) लगभग 120 किमी वाया  दुधी धामनोद. महेश्वर. मंडलेश्वर , रास्ता अच्छा जलपान – मांडव ,  दोपहर भोजन : बांके बिहारी मंदिर , महेश्वर , रात्रि भोजन विश्राम –हरिओम आश्रम बडवाहा डीज़ल – मांडव

विशेष: अगला विवरण 4.8.19 को देखिये

Leave a comment